सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

TERA JIKRA FARISHTE LIKHTE तेरा जिक्र फ़रिश्ते लिखते ek tu sahcha tera naam sachcha

तेरा जिक्र फ़रिश्ते लिखते चाँदी की किताबा में ।

हमने भी तुम्हें देखा, खुली आँख के ख्वाबों में।।




इन्सान के दिल में तो, ख्वाहिश के अंधेरे हैं।
मेरे सतगुरु मुझे ले चल, कहीं दूर गुलाबों में ।।

बे ख्वाहिश हूँ जब से, दिल तुमने किया रोशन।
बैठे-बैठे शाम ढली, हमें तेरी यादों में।।

आवाज सुने कैसे, तेरी जो दिल में आती है।
दिल तो डूबा है हवस के, शोर शराबों में ।।

क्या उनको मिलेगा खुदा, जो बहस के हैं कायल।
सारी दुनियाँ उलझी है, सवाल जवाबों में।।

दीदार की ख्वाहिश है, तो रोशन कर दिल को।
और आग लगा बेकार के पन्नों में किताबों में।।

सद किताबों सद वरक दरनार कुन।
जानो दिलरा जानिबे दिलदार कुन।।

फुलसन्दे वाले बाबा, तू तस्वीरें मुहब्बत है।

देखा है खुदा हमने, तेरी ख्वाब-सी आँखों में।।

दोहा:-

वो ही आदमी मंजिल तक जा सकता है, |
आंधी तूफानों में भी जो चराग जला सकता है।

लेखक एवं गायक :

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