सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

तेरी मुहब्बत के इन चरागों को-teri muhbbat ke in charagon ko

तेरी मुहब्बत के इन चरागों को मैंने दिल में जला लिया है 

ये प्यार मेरा रहे सलामत, तुमको दिल में बसा लिया है।। 
अब लाख आँधी-तूफान आये, मुझको इनका गम नहीं 
ये नाम तेरा अपने दिल में हमने जाना लिखा लिया है।। 
मैं सवाली दर-दर फिरूँ क्यों, तेरा दर है और मेरी झोली 
क्यों हाथ गैर के आगे फैलाऊँ जब तुमको अपना बना लिया है।। 
तेरे लिए बेचैन फरिश्ते, तारों-सितारों में फिरते रहते 
जब मेरे दिल ने तुमको पुकारा गले से तुमने लगा लिया है।। 
फुलसन्दे वाले बाबा तुमसे मुझको अकेले में कुछ है कहना 
तेरी अदाओं की खुशबुओं ने दिल हमारा चुरा लिया है।
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ek tu sachcha tera naam sachcha,satpurush baba fulsande vale
satpurush baba fulsande vale 




तुम्हारे प्यार ने कितना मुझे संभाल दिया 
किसी ने दिल भी दुखाया तो हँस के टाल दिया।। 
मेरे मालिक तेरी रहमत का क्या ठिकाना है 
मैं तो काँटा था मुझे फूलों के संग डाल दिया।। 
हम भी रहते थे कभी आपकी ही महफिल में 
बुरा समझ के हमें दिल से क्यों निकाल दिया।। 
तुम्ही कहो के मैं इस दिल के दुःख को किससे कहूँ 
गैर क्या अपनों ने ही रजों गम मलाल दिया ।। 
बाबा फुलसन्दे वालों कुछ तो कहो चुप क्यों हो 
तुम्हीं ने मेरे बुझे दिल को नूर जलाल दिया।।
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