निगाहें तुम्हें आज भी ढूँढ़ती हैं
मेरी दुनियाँ छोड के चले जाने वाले
मैं पतझड़ के काँटों से आज भी बिंधा हूँ
मैं पतझड़ के काँटों से आज भी बिंधा हूँ
मैं गम के अंधेरों में डूबा हुआ हूँ
कभी मेरे संग थे तुम्हारे उजाले
कभी मेरे संग थे तुम्हारे उजाले
इस जिन्दगी का भरोसा नहीं है
वक्त हमेशा एक-सा नहीं है।
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| satpurush baba fulsande vale |
कोई दुनियाँ में है कब तक कुछ पता नहीं है।।
हजारों दुखों से घिरी जिन्दगी है
हजारों दुखों से घिरी जिन्दगी है
तेरे आगे रोना ही बन्दगी है
तेरी रजा में ही मेरी पसन्दगी है।।
तेरी रजा में ही मेरी पसन्दगी है।।
तड़पती हुई मेरी चाहत है
अब तक तुमसे ही मेरे दिल को राहत है
अब तक हमें तुमसे फुलसन्दे वालों
मुहब्बत है अब तक।।
तस्बीह के दानों में तेरी ही सूरत थी,
तस्बीह के दानों में तेरी ही सूरत थी,
मुझको हर एक निगाह में तेरी ही सूरत थी।
तूने जो भेजे थे मेरे पास फरिश्ते,
तेरी ही महक थी उनमें तेरी ही सूरत थी।


1 Comments
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा 🙏🏻
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है