मुक्ति का रास्ता – एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
सतपुरुष बाबा फुलसन्दे वाले कहते है- ऋषि सत्यकाम को उनके गुरु गौतम ऋषि ने कहा कि पारब्रह्म परमेश्वर की सदा स्तुति करते रहना तथा रोगी और लाचारों की सेवा करते रहना तुम्हारे लिये स्वर्ग का दरवाजा खुला रहेगा ।
ऋषि सत्यकाम एक बार गन्धमादन पर्वत पर गये वहां एक ब्रह्मजून गुफा थीं जिसके बारे में प्रसिद्ध था कि जो उस गुफा से बाहर आ जाता है उसे फिर जन्म मरण में नहीं आना पड़ता वह मुक्त हो जाता है। कितने ही सन्यासियों ने कहा जब आप यहाँ तक आ ही गये हैं तो उस गुफा में जरुर जावें ताकि महान पुण्य मिल सके, किन्तु ऋषि कहा जो रास्ता मेरे गुरु ने दिखाया है उसे छोड़कर मैं किसी दूसरे रास्ते की इच्छा भी नही करुगाँ ऋषि उस पर्वत पर कई महीने रहे परमेश्वर की आराधना ओर दु:खी लाचार लोगों की सेवा करते रहे । जब वे वहाँ से लौटे तो उनके गुरू ने पूछ लिया तुमने ब्रह्मद्वार देखा या नहीं सत्यकाम ने कहा भगवन जो रास्ता आपने मुझे दिखा दिया उसे छोड़कर दूसरा रास्ता देखने की मैंने जरुरत नही समझी। गुरु ने उसे गले से लगा लिया और बोले मुक्ति का वास्तविक रास्ता तो यही है जिस पर तुम चल रहे हो।

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