सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

मैं दर्द लेके अपना st men dard leke apna

मैं  दर्द लेके अपना दर दर फिरा नहीं ।

 men dard leke apna dar dar fira nahi |

मैं दर्द लेके अपना दर दर फिरा नहीं ।


लोगों ने बहुत गिराया पर मैं गिरा नहीं ।।

सर पे हजारों तूफां थे थीं आँधियाँ हजार ।

फिर भी तेरी वफा से मैं फिरा नहीं ।।

इन्सान का कद कितना छोटा हो गया है

अब पर उलझने हैं इतनी के मिलता सिरा नहीं ।।

रूह कैद है दुनियाँ में कि मैं तुझे देख ना सकूँ ।

जाहिर में कोई दीवार कोई पींजरा नहीं ।।

हर हरफ जो तुझसे कहूँ ऋचा सा लगे है |

लेकिन मैं कोई अग्नि वायु अंगिरा नहीं ।।

जो तेरे हो रहे चुप हो रहे वो बस ।

कोई बहस नहीं कोई जिरह नहीं ।।

दिल कहता है मुझे तू अपने सीने से लगाले ।

यूँ तो मैं कोई मोती नहीं कोई हीरा नहीं ।।

क्यों आँख गीली हो गयीं बिछुड़ने के गम से ।

अभी तुझसे दूर जाने का फैसला किया नहीं ।।

गुलशन को हमने खून दिया तो सुर्ख हैं गुलाब ।

सबका जिक है पर हमारा जिक तक नहीं ।।।

satpurush baba fulsande vale
ek tu sachcha tera naam sachcha
satpurush baba fulsande vale


खुद अपने गमे दिल का हमने कर लिया इलाज |

तलाश में चारागरों की मैं दनियाँ में फिरा नहीं ।।

अभी तो फकत खयाल है सफर-ए-आखरत का

ये इब्तदा नहीं है ये इन्तहा नहीं ।।

उस रब की बंदगी में करदे तू फना खुद को

जिन्दगी मौत के दरमियाँ जरा भी फासला नहीं।।

दिल में तो बहुत गुबार था कहना भी बहुत था

तेरे सामने मगर एक भी आँसू गिरा नहीं ।।

मेरा वजूद क्या है एक दीवार है गिरा दो

सब कुछ तो तुम्हारा है कुछ भी मेरा नहीं ।।

मुद्दत से हैं नाराज चलो चलके मनालें

कोई काम जिन्दगी में भला,अब तक करा नहीं ।।

सब चले गये हम बैठे रहे क्या ढूँडते रहे

वो पूछते हैं सुन क्या यहाँ कोई भी तेरा नहीं ।।

बेखुदी में अदब भूल गये क्या करें साहिब

और होश आया तो भी फर्ज याद रहा नहीं ।।

रग रग में यूँ तो मेरी एक दर्द का दरया था

तू साथ था इस वास्ते मैं दरया में बहा नहीं ।।

मैं क्या था सूखा पेड़ था जो सूखा पड़ा रहा

बरसात बहुत बरसी पर ये हुआ हरा नहीं ।।


जो उठ गये तेरे दर से वो तेरे नहीं थे


ये मेरा सर था के झुक गया तो फिर उठा नहीं ।।


बर्वाद जिसकी एक नजर ने हमें किया


ये देखो रंज उसके दिल पे जरा नहीं ।।

आदमी की जिन्दगी ना जाने कहाँ दफन

पर है अभी तक कुछ जो अब भी मरा नहीं।।

सोथोडी सी पीके बहक गये वो कमजर्फ लोग थे

कहीं और के होंगे वो ऐसा मेरा शहर नहीं ।।

दामन पे तेरे गिरते तो बेशक ही मोती बनते

बहते हैं मेरे ऑसू पर दामन तेरा नहीं ।।

तकदीर ने मुझे तो तुम्हारा बना दिया

एक तू है आज तक भी जो तू मेरा नहीं ।।

बेचैन मेरी रूह पे साया था तेरा बेशक

ये मेरा साया कहाँ कहाँ भटकता फिरा नहीं ।।

कुछ देर पास बैठो तो सकून हो दिल को

जी भरके नहीं देखा ये दिल भरा नहीं ।।

कई सदियाँ चाहियें तेरे मेरे इश्क को

महबूब खाली है मेरा सागर अभी तक भरा नहीं ।।

कुछ कहना है तुमसे अगर थोड़ी सी हो फुर्सत

दुनियाँ में सिवा तेरे मेरा कोई दूसरा नहीं ।।

औरों के ऐब ढूँडने में लगे पड़े हैं जो

उनसे कहो तुम्हारे सिवा कोई बुरा नहीं ।।

मंजिल उसे मिली है जो मुश्किलों से ना डरा

बिजली गिरी हजार पर पीछे मुड़ा नहीं ।।



,मंजिल उसे मिली है जो मुश्किलों से ना डरा
बिजली गिरी हजार पर पीछे मुदा नहीं ।।

पहले ही हिम्मत हारके क्यो बैठ गये तुम

वो जीतेगा कैसे मैदान में जाके जो लडा नहीं ।।

क्यों उदास दीखता है ये फूल जैसा चेहरा

मैने तो अभी कुछ भी तुमसे कहा नहीं ।

अच्छाई है गर अपने दिल में तो सुनो अ यार

हर कोई दुनियाँ में अच्छा है कोई बुरा नहीं ।।

मिल मिल के गले यार के दिल रोशन हो गया

मेरी नजर में उसके सिवा कोई दूसरा नहीं ।।

एक काफले की तरहा जिन्दगी गुजर गयी

अपनो की भीड़ है मगर कोई मेरा नहीं ।।

वो कैसे लोग थे जो अपनी बात पे मर मिटे

एक आज हैं कि आँख में शर्म जरा नहीं ।।

हर साँस तेरा दर्द था हर साँस तेरी याद

कागज की नाव को किनारा मिला नहीं ।।

रो रो के बहुत उनसे कहा अपना बनालो

वो बोले तेरा मेरा एक रास्ता नहीं ।।

बेगानो की तरहा वो मुझे देखता है ऐसे

जैसे कभी हमसे कोई नाता रहा नहीं ।।

हो जिसका हाथ तेरे हाथ में अ मेरे दोस्त

गिर गये पहाड़ लेकिन वो गिरा नहीं ।।

बेनकाब वहाँ जायेंगे फुलसन्दे वाले बाबा

दुनियाँ से पर्दा होगा यार का उनसे पर्दा नहीं

लेखक :-प्रभु सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

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