वल्लाह क्या नमाज ||
FARASI KALAM ||
गाफला अज ख्याबे बे दुनियाँ
दर गुजर बेदार बाश
जाहिला अज वहमे उक्बा
दर गुजर हुशयार बाशा
अ गाफिल
ख्वाबे दुनियाँ से जाग कर होश में आ,
अ जाहिल परलोक के प्रलोभन को त्याग कर होश
में आ ।
तर्क कुन ई कुफर खुद्दारी
ओ बुग्जो हिर्स की
दरगुजर दीनो दुनियाँ
जानेमन दीदार बाशा
कुफर,र्हिस हवस
लोभ लालच अहंकार को छोड़ दुनियाँ परस्ती को छोड़ और उस जानेमन उस परमप्रिय प्रभु
के दीन को कबूल कर के हमेशा हमेशा के लिये बस उसी का होजा ।
गर चे मे वाही के बूदी
मालिके कोनो मका
दावा ए दुनियाँ मकुन
ओ बंदा ए दरबार बाश।
अगर तू
कुलाकुल का मालिक होना चाहता है तो कोई दावा ना कर और उसका बंदा बन जा ।
गर चे मे ख्वाही कि अज
गम दूर बाशी अ पिशर
गम दूर बाशी अ पिशर
अज तकब्बुर दर गुजर
अ औलिया गमख्खार बाश ||
अगर तू दर्दो गम
की दवा चाहता है तो अहंकार को दूर कर और कुदरत की मुहब्बत के गम को दिल में जगा ले
।
गर चे मे वाही के बाशी
दर जहाँ इकबाल मन्द
दरगुजर अज मालो जर
अ बुल हविश नादार बाशा ||
अगर तू भग्यशाली
होना चाहता है तो अ लालची ! माल दौलत की हवस को दिल से निकाल दे ।
गर चे वाही दोस्त दर
दुनियाँ गुजर अज दोस्ताँ
जामे वहदत नोश कुन
दर ई नशा सरशार बाश||
अगर तू चाहे
के परमेश्वर तेरा दोस्त हो तो दुनियाँ की दोस्ती छोड़कर जामे वहदत यानी रूहानी नशे
को पी और रात दिन | उसमें लीन रह ।
गर तू मे खाही के सरदारी कुनी बर दो जहाँ |
अगर तू दोनो
दुनियाँ का सुल्तान बनना चाहे तो अपना सर तन से अलग करले यानी अहंकार को छोड़ दे मशो ता अज सखावत बरी
के गोये बही अज सखावत बरी॥
दान देने में
अपने मन को लगाये रह अपने मन को कंजूसी की तरफ को ना ले जा कि दान शीलता तुझे
आसमान के गुम्बद तक लेजाने वाला पुण्य करम है ।
बखील
अज बूअद जाहिद बहरोबर बहिश्ती न बाशद ब हुक्मेखबर।। अगर कंजूस आदमी भक्त भी होवे और दरयाव
तथा जंगलो में जाके कठोर तप करे तो भी वह परमेश्वर के साथ स्वर्ग में नहीं विचरता ।
बखीलां गमे सीमो जर्मे खुरन्द।। परमेश्वर की राह मे दान करने वाले
दानी लोग आराम से अपने पुण्य के फल को खाते हैं और बखील यानी कंजूस आदमी सोने
चाँदी के गम में रात दिन परेशान हुए रहते हैं । अगर कारून का खजाना भी कोई कंजूस
के हाथ में देदे तो भी संसार में ना तो कोई उसका हमदर्द होता है और ना कंजूस कभी
सुख पाता है ।
दिलागर तवाजे कुनी अख्तयार
शवद खल्क दुनियाँ तुरा दोस्तदार।।
हे मेरे हृदय
अगर तू संसार में विनम्रता यानी विनय शीलता को धारण करे तो सारा संसार तेरा मित्र
हो जावे । सारी दुनियाँ तेरे आगे नतमस्तक रहे।
तवाजे जयादत कुनद जाहरा
के अज महर परतब बूअद महारा॥
अगर तू
दूसरों पर ज्यादा तवज्जह करे दूसरो की ज्यादा खातिर | करे तो तेरा
मर्तबा ऐसा बुलन्द हो जावे कि जैसे चाँद और सूरज | संसार में
चमकते हैं ऐसे ही तू चमकने लगे ।
तवाजे कुनद मदरा सरफराज
तवाजे बूअद सरवर रा तराज||
दूसरे की
खातिरदारी की आदत से आदमी का सर बुलन्द होता है उसे बड़प्पन हासिल होता है । यह
सरदारों का निशान है ,यानी खातिर तवाजो करके मनुष्य सब में श्रेष्ठ बन जाता है कसेरा के गर्दन कसे दर सरास्त
तवाजे अजोयाफतनखुशतरास्ता
जिस आदमी के
गरूर सर में है ना तो वो झुकता है ना किसी पर तवज्जह देता है ना राहे रास्त यानी
सच की राह पर चलता है ना परमेश्वर उसे पसन्द करता है ना देवता ना पितर ना फरिश्ते
ऐसे | बदगुमान आदमी को अच्छा कहते हैं वरन लानत भेजते हैं
तकब्बुरमकुन जिनहार अपिशर केरोजेजदस्तसदआईबशर||
अ नवयुवक
गरूर की हवा में ना उड़ के इस गरूर के हाथ एक दिन तुझे मुँह के बल गिराया जावे ।
तकब्बुर बूअद आदते जाहिला
तकब्बुर ना आयद ज साहब दिला। गरूर करने की आदत जाहिलों की होती है
जो जाहिल हैं वे मगरूर अवश्य होते हैं और जो ज्ञानी जन हैं वे विनम्र होते हैं
साहिब दिल इन्सानो के पास गरूर फटकता भी नहीं है ।
उस संगे
आस्तां पे जबीने नियाज है
वल्लाह
क्या नमाज हमारी नमाज है ।।
हर आइने
के पर्दे में आइना साज है
हर बंदे
के लिबास में बंदानवाज है।।
अ हमनशीं
वो कूचा ए महबूब का आलम
सुल्तान
जिस गली का गुलामे अयाज है ।।
वो खाके
आस्तां है तेरी खाके आस्तां जिस पर जबीने शौक
के सजदों को नाज है ।।
किसकी
तरफ को दस्ते तमन्ना दराज हो
आलम में
कोई आपसा बंदा नवाज है ।।
जाहिद को
अपने जौहदो इबादत पे है गरूर
मुझको
तेरे करम तेरी रहमत पे नाज है ।।
हर शक्ल
में दीखे है तेरी शक्ल अ जाना
अब ये
खुला कि ऐन हकीकत मजाज है ।।


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