सारा संसार ही प्यासा-
sara sansar hi pyasa dikhai deta hai
सारा संसार ही प्यासा दिखाई देता है ।
मुझको ख्वाब में दरया दिखाई देता है ।।
कोई दौलत का प्यासा दुनियाँ मेंकोई शोहरत का प्यासा दुनियाँ में
ख्वाब में ही सही देखा तो है उसे मैने
लावजूदी में छुआ तो है उसे मैने
कुछ तो है जो सज्दे में दिखाई देता है ।।
दिल है प्यासा और आत्मा प्यासी है
हर खुशी है मगर रंज और उदासी है
शाहों के हाथ में कासा दिखाई देता है ।।
सकून तुमसे चाँदना तुमसे है
दर्द तुमसे दवा भी तुमसे है
प्यासे को तो हर तरफ पानी दिखाई देता है ।।
कोई जन्नत की हूरों का प्यासा
कोई साकी शराब का प्यासा
हर तरफ एक तमाशा दिखाई देता है ।।
खुश्क होठो से ये बात कैसे कहूँ
ख्वाब के दरया से पानी पिउँ तो कैसे पिउँ
कभी तू अपना कभी पराया दिखाई देता है ।।
हर कोई अपने दुख में तन्हा है
जिस्म तन्हा है जान तन्हा है
औरों का दर्द किसको दिखाई देता है ।।
रात दिन किसको पुकारे है तू अ जज्बाए दिल
वो ना आयेगे पलटके वो है संगे दिल
यार की शक्ल में क्यों रब दिखाई देता है ।।
ज्ञान की प्यास जब आदमी को लगती है
हिरदै में एक ज्योति जगती है
कतरा कतरा भी समन्दर दिखाई देता है ।।
बात अपनी भी है पराई भी
वो सजन मेरा भी है हरजाई भी
जहाँ ना चाहो वो वहाँ भी दिखाई देता है ।।
ज्ञान अमृत जो गुरू से पीता है
फरिश्ता बनके वो दोनो जहाँ में जीता है
अपने ही दिल में उसे रब दिखाई देता है ।।
बाबा फुलसन्दे वाले कहते हैं
देवासुर धरती पे दोनो रहते हैं।
सच्चा आदमी कोई बिरला दिखाई देता है ।
मृगतृष्णा में हर कोई दिखाई देता है ||
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| satpurush baba fulsande vale |
बात अपनी भी है पराई भी
वो सजन मेरा भी है हरजाई भी
जहाँ ना चाहो वो वहाँ भी दिखाई देता है ।।
ज्ञान अमृत जो गुरू से पीता है
फरिश्ता बनके वो दोनो जहाँ में जीता है
अपने ही दिल में उसे रब दिखाई देता है ।।
बाबा फुलसन्दे वाले कहते हैं
देवासुर धरती पे दोनो रहते हैं।
सच्चा आदमी कोई बिरला दिखाई देता है ।
मृगतृष्णा में हर कोई दिखाई देता है ||


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