दिल के हुजरे में है तेरा चाँदना
जहाँ फ़रिश्ते करते हैं आराधना
महराब में अम्बर के एक चिराग बले हैं,
स्वर्ग में और नरक में है तू ही तू
सूरते इन्साँ में तू है हू-ब-हू
हर जगह दीखे तेरा ही चाँदना।।
भूल के तुझे जिन्दा रह सकता नहीं
और तेरा गुण मुँह से कह सकता नहीं
सूना तुझ बिन मेरे दिल का आँगना।।
जो दुखावे दिल मेरा वो यार क्या जिसमें हस्ती ना मिटे
वो प्यार क्या तेरे बिन नहीं कोई मेरा आशना ।।
फुलसन्दे वाले बाबा क्या मुझे चाहिए
थोड़ा-सा तेरा नूर मुझको चाहिए
सतगुरु देओ ज्ञान का मुझे चाँदना ।।
महराब में अम्बर के एक चिराग बले हैं,
ये दिल तुम्हारी चाह में बे-नियाज बले हैं।
वीरानों से कहता फिरूँ हूँ फरिश्तों की बातें
धरती पर हूँ मैं मगर दिल तेरे साथ बले हैं
गायक एवं लेखक :-प्रभु सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वाले
गायक एवं लेखक :-प्रभु सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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