दो दिन की दुनियाँ है, दो दिन की जिन्दगी
या रब तेरी बन्दगी में गुम है मेरी जिन्दगी
प्यार मुहब्बत ही है मालिक की बंदगी
दिल के पर्दे को उठा के, दिल के भीतर जो झाँके
उसको दीदारे यार हो जायेगा-
एक लहर आती है, एक लहर जाती है
सागर किनारे पे कैसी उदासी है
दिल ना टूटे किसी का, यार रूठे ना किसी का
औरों के काम आये, वो ही है आदमी
बाँटे जो गम किसी का, वो ही है आदमी
दुनियाँ से क्या ले जाना, खाली हाथों है जाना
पंछी की तरहा से तू उड़ जायेगा।
दुःख की अधेरी रातें, प्यार की चाँदनी रातें
छोटी-सी जिन्दगी में सुख की और दुःख की बातें
दो दिन हैं पतझड़ के दो दिन बहारों के
दो दिन हैं दुश्मनों के दो दिन हैं यारों के
बाबा फुलसन्दे वाले, कहते हैं ओ मतवाले
ख्वाब की तरहा तू गुजर जायेगा। ...................
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लेखक एवं गायक -:सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
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लेखक एवं गायक -:सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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