जैसे बच्चे खिलौनो के लिए ललचाते रहते।
ऐसे ही इन्सान जरा जरा बातों पर बिगड़ जाते॥
जो संयम रखतावो पछताने से बच जाता।
स्वामी मत बनो सच्चा सेवक तुमको नहीं बनना आता॥
फुलसन्दे वाले बाबा कहतेतन मन का अंधेरा करो दूर।
सब तरफ फैला हुआ है उसका निर्मल नूर ।।
नमस्ते इंडिया !
नमस्ते ब्रह्मावर्त नमस्ते आर्यावर्त नमस्ते
भारतवर्ष नमस्ते हिन्दुस्तान नमस्ते इंडिया !
नमस्ते देवभूमि नमस्ते मात्रभूमि नमस्ते
भारतभूमि नमस्ते हिन्दुस्तान नमस्ते इंडिया !
यदि पीछे ना हटो तुम तो सब कुछ पा सकते हो ।
गगन के तारों को छूने तुम उड़के जा सकते हो ।
अधिकारों के कोलाहल से उपर उठना होगा ।
कर्तव्यों का बोझ सिर पे उठाके चलना होगा ।
मेरे साथियों कब तक तुम असन्तुष्ट रहोगे ।
पीडित मानवता के एक दिन तुम जहाज बनोगे ।
उच्च करम करने से नर भी नारायण बन जाता ।
रोशनी के बीज हजारों दिलो में वो उगाता ।
स्वारथ के नरक कुण्डों में लोग गिर रहे हैं ।
फुलसन्दे वाले बाबा उन्हें निकालते फिर रहे हैं ।
नमस्ते ब्रह्मावर्त नमस्ते आर्यावर्त
नमस्ते भारतवर्ष नमस्ते हिन्दुस्तान नमस्ते इंडिया ।
नमस्ते देवभूमि नमस्ते मात्रभूमि
नमस्ते भारतभूमि नमस्ते हिन्दुस्तान नमस्ते इंडिया ।
नमस्ते इंडिया । नमस्ते इंडिया ।

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