फूल जैसा दिल मैंने तेरे चरणों में चढ़ाया है।
मेरे हृदय में मेरे सतगुरु तेरा उजाला छाया है।।
देवता जिसका पार न पाते ऐसी तेरी माया है।
वो ही जाने तेरी महिमा जिसपे तेरा साया है।।
अमर लोक से सतगुरु आये मन में उजाला छाया है।
ज्ञान का दीवा मेरे गुरु ने हर एक दिल में जलाया है।।
कर किरपा मेरे सतगुरु साहिब दर पे सवाली आया है।
ना झोली ना हाथ कटोरा, खाली हाथों आया है।।
जिसने करा गुमान हवा ने उसका बेड़ा डुबाया है।
जिसने पकड़े चरण गुरु के बेडा पार लगाया है।।
फुलसन्दे वाले बाबा ने कैसा अमरत बरसाया है।
धरती से लेके गगन तलक, चाँदना-सा छाया है।।
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| satpurush baba fulsande vale |
देवता करें आराधना और तुमको नींद आती है,
चाँद तारे जागते हैं और तुमको नींद आती है। |
ऐसा भी क्या मुकद्दर जो सोता ही रहे , |
वो जिन्दगी भी क्या जिन्दगी भर जिसे नींद आती है।


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