सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

फूलों की तरहा से तुम phoolo ki taraha se tum

फूलों की तरहा से तुम मुझमें महकते रहते हो | 

मुझे अपना कहते रहते हो | 
मेरी आँखों में, दरिया बन के, 
बहते रहते हो मुझे अपना कहते रहते हो ।

मृत्यु लोक में मेरी, आँखों के दीवे, 
तेरे लिये जलते रहते |
 तेरी अस्तुती में, मेरे हिरदै से मन्त्र निकलते रहते | 
मेरे हिरदै में, मुझसे अन्जान बने क्यों रहते हो | 
अपना भी कहते रहते हो।।

कौन देखेगा सारी सष्टि में, 
तुम्हारी रोशनी है देवताओं में और फरिश्तों में, 
तुम्हारी रोशनी है चाँद तारों में लहर सी बनके बहते रहते हो।

फुलसन्दे वाले बाबा तुम मुझको अपना बना के रखना

मेरा कोई नहीं है सिवा तेरे गले से लगा के रखना | 
सदियाँ बीत गईं, मेरी तुम आत्मा में रहते हो।।
ek tu sachcha tera naam sachcha,satpurush baba fulsande vale
satpurush baba fulsande vale 



काम आ ना सकें अपनी वफाएँ तो क्या करूँ, 
आसमाँ तक जा ना सके अपनी दुआएँ तो क्या करूँ।
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लेखक एवं गायक : प्रभु सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले 

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