आज पूरणमासी है आसमान पर पूरा चांद है।
मैं हूँ चांद का टुकड़ा प्रभ तू पूरा चांद है|
कस के पकड़ा है चांद को
मेरी रूह का तू है चांदना ।
आज फरिश्ते नाचेंगे उतर के मेरे आंगना॥
फुलसन्दे वाले बाबा कहते कोई गावे सारी रात।
आज मिलावा पी का तुम जगयो सारी रात|
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सुख सन्तुष्टी
सतपुरूष बाबा फुलसन्दे वाले कहते हैं-ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर नंदी शान्त भाव से एक वृक्ष तले एक शिलाखण्ड पर बैठे हुए थे उनके मुख पर पानी की एक बूंद आके गिरी उन्होंने वृक्ष की तरफ देखा एक कव्वा रो रहा है उसकी आँखों से जलधार बह रही है। नंदी ने कहा कागराज क्या हुआ तुम क्यों दुखी हो? तुम्हें क्या कष्ट है ? वह कव्वा नीचे उतर आया नंदी को प्रणाम करके बोला हे महासिद्ध ! हे शिव के अति प्रिय ! हम कव्वों के जीवन में दुख और अपमान के सिवा और कुछ नहीं है, जहाँ जाते हैं वहीं हमारा तिरस्कार होता है, हमारी वाणी इतनी कठोर है कि कोई भी हमसे प्यार नहीं करता। नंदी गम्भीर हो गये कागराज बताइये मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ? कव्वे ने कहा हे देव ! आप मुझे हंस बनादो देखो हंस से सभी प्यार करते हैं, सदा मानसरोवर में वह मोती चुगता रहता है। नंदी ने कहा मैं ऐसा कर सकता हूँ पर पहले तुम एक बार हंस से जाकर मिल आओ वह अपने जीवन से खुश तो है ना? कव्वा उड़ता हुआ हंस के पास गया नमस्कार करके कहने लगा हंस देव आप बडे भाग्यशाली और प्रसन्न हैं आप धन्य हैं, हंस ने झुंझलाकर कहा ऐसा कौन कहता है कि मैं बड़ा प्रसन्न हूँ रात दिन पानी में पड़ा रहता हूँ इसमें भला कौनसा आनन्द है? मेरा रंग और पानी का रंग एक है, पता ही नहीं चलता कहाँ मैं हूँ कहाँ पानी है, ये भी कोई जीवन है ? कव्वे को अचरज हुआ वह बोला तो आप प्रसन्न नहीं हो? हंस ने कहा बिल्कुल भी नहीं मुझसे तो तोता अच्छा है कितने सुन्दर हरे हरे पंख हैं उसके लाल मणी जैसी सुन्दर मस्त चोंच है चाहे जो भी फल खाओ वह स्वतन्त्र है वह श्रेष्ठ है। कव्वे ने कहा भगवन यदि हम नंनी सिद्ध के पास जावेंगे तो वे कहेंगे जाओ तोते से मिलो तो हम पहले ही तोते से क्यों ना मिल लें? वे दोनो उड़ते हुए ऐसे बाग में पहुँचे जहाँ बहुत से तोते थे पर वे हरे रंग के होने के कारण वृक्षों के पत्तों में दीख नहीं रहे थे बहुत चक्कर काटने के बाद एक तोते को उन दोनो ने देखा कहा तोते भाई प्रणाम कहो कैसे हो ? भाई क्या तुम्हारी मस्ती है क्या सुन्दर सलोना रूप पाया है क्या मजे के फल तुम खाते हो अच्छा है कि विधाता हमें भी तोता बनादे ? तोते ने सुना तो एक दम तुनक कर बोला ये तुम क्या करने जा रहे हो ऐसी प्रार्थना कभी मत करना हम तो जरा सी बात पर बंधन में पड़ जाते हैं शिकारी हमें बाजार में बेच देता है हम सारी उमर पिंजरे में पड़े दुख भोगते हैं हम बड़े दुखी हैं ।


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