सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

तेरी अस्तुती में दिल-teri astuti men dil

तेरी अस्तुती में दिल का दिया जल रहा है। 
जैसे जमीं से आसमा मिल रहा है।।

मैं फूलों की डाली झूमती बहारें।
मैं आकाश जिसमें है झिलमिल सितारे।। 
ek tu sachcha tera naam sachcha,satpurush baba fulsande vale ,yogi aaditynaath ji ,
satpurush baba fulsande vale  with yogi aaditynaath ji ,

मैं संसार सागर तू मेरा किनारा । 
जनम-जनम होवे, तेरा उजियारा।।

मैं अंगूर की बेल, तेरे चमन में ।।
मैं हूँ बनफूल, तेरी दुनियाँ के बन में।। | - 

मैं एक पंछी हूँ तू एक गगन है। -
 तू सच्चा मोती, सीप मेरा तन है।।

फुलसन्दे वाले, बाबा ये कहते। 
हम तो प्रभु तेरे, हिरदै में रहते।।


तीर बरसाने वाले आदमी का दिल तो अंधेरों का घर है,|| 
दिल को अब कौन समझता है के ख़ुदा का घर है। 
सतगुरु हर दिल को तू मुहब्बत का घर कर दे, 
अपने पैगाम से दुनियाँ में उजाला कर दे।
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