तेरी गलियों का फेरा रे, बाबुल एक दिन छुट जाना
मेरी काया का पिंजरा वे, बाबुल एक दिन टुट जाना।।
पंछी तो बस पंछी ठहरे, जाने कब तक का बसेरा।
एक ना एक दिन बाबुल मेरे उजड़ जायेगा डेरा।
दुनियाँ रैन बसेरा रे पलट के फिर नहीं आना।।
दूर गगन की छाँव में, एक जोगी गीत गावे,
मैं क्या करूँ अरे मेरे बाबुल, मेरा दिल भर-भर आवे।
बड़ी दूर किनारा रे, बाबुल मैंने वहीं जाना।।
रात-रात भर जागे सितारे, मुझे नींद नहीं आवे,
मेरे कान पे कोई फरिश्ता, तार-बीन बजावै ।
झूठे दुनियाँ के नाते वे, हर नाता बाबुल टूट जाना।।
दिल क्यों तड़पे मेरा रात-दिन बाबा फुलसन्दे वाले,
दुनियाँ में कौन छोड़ गया मुझे अपने हाथों पे ठाले।
गुरु हाथ ना थामै तो, चौड़े में बाबुल लुट जाना।।
मैं चराग लेके आँधी में जिन्हें ढूँढ़ता फिरा,
मैं चराग लेके आँधी में जिन्हें ढूँढ़ता फिरा,
आज मेरे चराग को बुझा रहे हैं वही लोग।
मेरा हाल सुन के आप गमगीन हो गये,
फुलसन्दे में भी मेरी हँसी उड़ा रहे हैं लोग।
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लेखक एवं गायक :-प्रभु सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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