तोड़ के मेरा दिल क्या मिलेगा तुम्हें
खुदा के घर भी (स्वर्ग में भी) अंधेरा मिलेगा तुम्हें
शौक से आजमा लो मेरी वफा
के मेरा दिल भी तड़पता मिलेगा तुम्हें ।।
दिल के सौ टुकड़े कर दो हर टुकड़े में |
देखना अपना ही चेहरा मिलेगा तुम्हें ।।
दिल खुदा का है घर बात मानो मेरी |
और कहीं पे खुदा ना मिलेगा तुम्हें ।।
तुम कहीं भी रहो पर ये जान लो |
संग-संग मेरा साया मिलेगा तुम्हें ।।
देवता चाहे लाखों आवें मगर |
सतगुरु से ही अमरत मिलेगा तुम्हें ।।
बाबा फुलसन्दे वाले ये कह गये |
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| ek tu sachcha tera naam sachcha |
एक रोज तेरी दुनियाँ से चला जाऊँगा कहीं
तेरा ज़िक्र दूसरी दुनियाँ में सुनाऊँगा कहीं।
आने वाले आएँगे और भी बहुत ,
खुशबू तेरी मगर छोड़ जाऊँगा यहीं-कहीं।


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