सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

तोड़ के मेरा दिल tod ke mera dil

तोड़ के मेरा दिल क्या मिलेगा तुम्हें 

खुदा के घर भी (स्वर्ग में भी) अंधेरा मिलेगा तुम्हें 
शौक से आजमा लो मेरी वफा 
के मेरा दिल भी तड़पता मिलेगा तुम्हें ।। 
दिल के सौ टुकड़े कर दो हर टुकड़े में | 
देखना अपना ही चेहरा मिलेगा तुम्हें ।। 
दिल खुदा का है घर बात मानो मेरी | 
और कहीं पे खुदा ना मिलेगा तुम्हें ।। 
तुम कहीं भी रहो पर ये जान लो | 
संग-संग मेरा साया मिलेगा तुम्हें ।। 
देवता चाहे लाखों आवें मगर | 
सतगुरु से ही अमरत मिलेगा तुम्हें ।।
बाबा फुलसन्दे वाले ये कह गये | 
satpurush baba fulsande vale,ek tu sachcha tera naam sachcha
ek tu sachcha tera naam sachcha
एक रोज तेरी दुनियाँ से चला जाऊँगा कहीं 
तेरा ज़िक्र दूसरी दुनियाँ में सुनाऊँगा कहीं। 
आने वाले आएँगे और भी बहुत , 
खुशबू तेरी मगर छोड़ जाऊँगा यहीं-कहीं।

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