भगवान मैं तुझको खत लिखता,
जो तेरा पता मुझे मिल जाता
तू पंख जो मुझको दे देता,
तेरे पास मैं उड़ के आ जाता ।।
खत में लिखता हे परमेश्वर, क्यों अपने से दूर किया मुझको रहे मुझमें मगर तू दीखे नहीं,
कितना मजबूर किया मुझको।।।
खत में लिखता तेरी दुनियाँ के,
हालात नहीं अच्छे स्वामी
माँ-बाप को दुखी औलाद करे, कहीं बाप अधर्मी है स्वामी।।।
जहाँ साधू शराबी जुआरी हों,
और राजा अत्याचारी हो
जहाँ पाप का डंका बजता हो,
वहाँ कैसे पूजा तुम्हारी हो।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहें,
प्रभू अपने दुःख कहाँ तक मैं कहूँ
मेरे करम ही मेरे दुख दाता हैं,
इस जहर से हे प्रभू कैसे बचूँ।।
राग -पीलू
तेरी आँखों की अमरत धार,
टकराई जब मेरे दिल से
मेरे पास फरिश्ते आये,
उतर के तेरी महफिल से |
सतगुरु तेरी नजर ने मेरे दिल का अंधेरा मिटाया २
पाप करम के लेख मिटे मन में उजयार समाया
दिल मेरा मिला तेरे दिल से ........ |
तुझपे मेरा जीवन मेरी आत्मा है कुर्बान |
परम पुरख परमेश्वर सतगुरु साहिब सजन सुजान
दिल मेरा मिला तेरे दिल से .... ३
अलख पुरख तेरा आरता होवे है दिन-रात
फुलसन्दे वाले बाबा तुम हो तीन लोक के नाथ
दिल मेरा मिला तेरे दिल से . . . . . . .


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