सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है। jab se tune mujhe deewana bana rakha hai-ek tu sachcha tera naam sachcha

अलख पुरख सुमरन तेरा करते संत फकीर ।
 मैं भी तेरा नाम जपूं भवसागर के तीर ।। 
जो गदा तेरे दर का उसको फिर कमी क्या है । 
मालूम है मुझको के शान तेरी क्या है। 
दुनियाँ की बात अलग अमीरों की बात अलग।
तेरे कूचे में तेरे फकीरों की बात क्या है।
मिल चुके खाक में उन्हें ताजशाही क्या । 
जो सवाली तेरे दर के उन्हें दुनियाँ से क्या
रोज फना होना है इन्सान की मंजिल ।
जो तुझपे खतम हुए उनसे तेरा पर्दा क्या है।
तेरी पनाह में रहते हुए आ जावे मौत मुझे। 
जो गुजरे तेरे बगैर वो जिन्दगी क्या है।
सजदे में रूखे यार पे मेरी नज़र थी। 
जन्नत के शौक में जाहिद तेरी बंदगी क्या है ।।
फनानियत की हकीकत को गर तू नहीं समझा । 
फिर राहे हकीकत में तेरी वफा क्या है ।।
कभी सोचा है दनियाँ पे मरने वाले । 
तेरी आँख की पुतली में ये जो रोशनी है क्या है। 
अ मेरे हमनशीं तू दिलो जां में समाया है ।
 ना देखू तुझे तो चाँद क्या है गुलशन क्या है ।।
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जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है। 
पत्थर हर शख्स ने हार्थों में उठा रखा है। 
माला जपता हूँ तेरी सज्दे करता हूँ तुझे। 
मैने अ यार तेरा नाम खुदा रखा है ।। 
पत्थरों आज मेरे सर पे बरसते क्यों हो । 
मैने तुमको भी कभी अपना खुदा रखा है ।। 
ना परिन्दा ना फरिश्ता ना सितारा हूँ मैं । 
फिर भी आसमान को घर मैने बना रखा है ।। 
जिक्र  होठों पे तेरा दिल में तेरी सूरत है । 
मैने माथे पे तेरा नाम लिखा रखा है ।। 
मुझको मंदिर या मस्जिद से गरज़ क्या है । 
मैने दरे यार पे सर अपना झुका रखा है ।।
दरो दीवार से आवाज तेरी आती है । 
मैने हर साँस में तुमको ही बसा रखा है ।। 
जिसको छूता हूँ वो गुल शाख से गिर जाता है । 
कैसा गुलशन मेरे रब तूने बना रखा है ।। 
जल रहा हूँ मैं दुख की अग्नि में । 
पर तेरी याद को सीने से लगा रखा है ।। 
दर्द तूने ने दिया तू  ही दवा है मेरी । 
मैने सर को तेरे आगे झुका रखा है ।। 
जख्म दुनियाँ ने दिये तूने अपना नूर दिया । 
मुझको सीने से फरिश्तो ने लगा रखा है ।। 
मुझको पूजा नहीं आती इबादत नहीं आती । 
मैने दरे यार को रब का दर बना रखा है ।। 
जाने किस रस्ते से आ जावे वो महबूब मेरा । 
मैने हर रस्ते पे फूलों को बिछा रखा है ।। 
वो भी राहों से तेरी लपटों से गुजरे होंगे। 
नाम जिसने भी मुहब्बत का सजा रखा है ।। 
पी जा सदमों का जहर हंस दे उफ ना कर | 
गम को सहने में भी कुदरत ने मज़ा रखा है ।। 

मुझको मत छेड़ हवा खयाले यार में गुम हूँ । 
बेवजहा शोर ये क्यों तूने मचा रखा है ।। 
मैं तेरे वास्ते दुनियाँ से लडता फिरता हूँ 
तेरे जैसा कोई दिलदार कहाँ रखा है ।। 
मेरे हमनशीं तेरे इश्क की गरम हवाओं ने । 
मेरे गुलशन को वीरान बना रखा है ।। 
बाबा फुलसन्दे वाले यूं बोले ।
मैने सीप में दिल के रब तेरा मोती छुपा रखा है ।।

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