जी मैंने छान लिया संसार, गुरु बिन मेरा कोई नहीं।
जिसके दामन पे औरों के आँसू,
अकरे सुनिये रे मेरी बात, गुरु बिन मेरा कोई नहीं।।
दो गज कफन का टुकड़ा होगा यो होगा सिंगार।
ना मैंने पूजे देवी-देवता ना मैंने कथा कराई।
ना मैंने पूजे देवी-देवता ना मैंने कथा कराई।
मैंने पूजे चरण गुरु के और धरम मेरा नाहि ।।
सतगुरु सतलोक के वासी इतनी किरपा करियो।
मेरी मट्टी ख्वार ना होवे, मेरी लज्जा धरियो।।
गुरु विष्णु हैं गुरु शिव, ब्रह्म गुरु अलख करतार ।
फुलसन्दे वाले बाबा मेरा करियो बेड़ा पार ।।
जिसके दामन पे औरों के आँसू,
उसने स्वर्ग से फूल चुगे हैं।
वो इन्साँ ही देवता है,
जिसने औरों के गम ले लिए हैं।।
जो धरम तेरे मन में नहीं है,
जो धरम तेरे मन में नहीं है,
तो धरती भी तुझको नरक है। |
जो नहीं तेरे मन में उजाला,
दिल अंधेरों में तेरा गरक है।।
छोड़ के अपनी खुशियों का गुलशन,
दूसरों के दुःखों को भी देखो।
खुदगर्जी में डूबे रहो मत,
औरों के दुःख के काँटे भी देखो।।
लाख जीवन-मरण मेरे होंगे,
पर ये दीवा बुझ ना सकेगा।
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| satpurush baba fulsande vale |
काफला तेरी उल्फत का या रब,
ऑधियों से ये रुक ना सकेगा।।
बाबा फुलसन्दे वाले ये कहते,
एक ही शाख के फूल हैं हम। |
एक यहाँ एक वहाँ पर, परमेश्वर तेरे फूल हैं हम।।


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