सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सोने का दीवा बाल के sone ka deeva baal ke

सोने का दीवा बाल के फिरूँ मैं चाँदनी रातों में।

नील गगन में देवता नाचे हाथ डाले हाथों में ||
मस्त बहारें आईं हैं, चाँदनी रातें आई हैं
सतगुरु ने परमेश्वर की अमरत धारा बरसाई है।।
एक दिन दुनियाँ उजड़ जायेगी,
फकत कहानी रह जाएगी।
हम न रहेंगे तुम न रहोगे,
बात हमारी रह जाएगी।।
बाबा फुलसन्दे वाले,
तुमसे मिले मुझे उजियाले तेरे प्यार में देवता भी,
होके रह गए मतवाले।।
ek tu sachcha tera naam sachcha ,satpurush baba fulsande vale



राग-जौनपुरी
सतगुरु अमरत बाँटे वो अमरत जाने मुझे कब मिलेगा।
नूर तेरा मेरे सतगुरु साहिब, जाने मुझे कब मिलेगा।।
बख्शो सतगुरु औगुन मेरे, चरणों पे दास पड़ा है तेरे।
तुम हो प्यार का सागर, ये सागर जाने मुझे कब मिलेगा।।
मेरी आँखों में करुणा के मोती,
मेरे तन-मन में तेरी ही ज्योति।
परमपुरख परमेश्वर तेरा ज्ञान,
जाने मुझे कब मिलेगा।।
सतगुरु बाबा फुलसन्दे वाले,
आत्मा में माँगू तेरे उजाले।
मैं रात हूँ तुम सवेरा, सवेरा जाने मुझे कब मिलेगा।।

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