इस दिल का पर्दा उठा के जो देखा,
फ़रिश्ते तुम्हारा ज़िकर कर रहे हैं।
चूमते हैं देवता दामन तुम्हारा,
चरागों की तरहा दिल जल रहे हैं।।
तुम्हारी नज़र से हैं रोशन सितारे।
तुमको मेरा दिल रात-दिन पुकारे।।
हजारों दफ़ा बनती बिगड़ती है दुनियाँ ।
तुम्हारे ही दामन में सिमटती है दुनियाँ ।।
है पर्दा हवस का आदमी के दिल पे।
है दूर इसीलिए, तेरी महफ़िल से।।
परम पुरुष बाबा फुलसन्दे वाले।
यकीं है मुझे एक दिन मिलेंगे उजाले ।
अरे धरम् पे चलने वालो, कभी भी उदास मत होना,
आफत हज़ारों आवें, पर निराश मत . होना।
चाहे अजबा-अजबा, काँटों से तीरों से बिंध जावे,
फिर भी कभी कुदरत पर से विश्वास मत खोना।


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