चरागों की तरहा ये दिल, तुम्हारी याद में जलता है।
अंधेरी रात वीरानों में, के जैसे चाँद निकलता है।।
तेरा बिस्तर फकीरी सतगुरु मुझे याद आता है।
तेरे संग रात भर वो दुआएं करना याद आता है।।
तेरे पैरों पे सर रख के मेरे जब आँसू बहते थे।
मुझे तुम देर तक सतगुरु तसल्ली देते रहते थे।।
भटकती हैं निगाहें आज भी गुजरे जमाने में ।
तुम्हें फुलसन्दे वाले बाबा पुकारे हैं दिल वीराने में ।।
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गुरु जी मेरा फन्द छुड़ा दो लख चौरासी से
मिला दो मेरी आत्मा की ज्योति, प्रभू अविनासी से।।
जनम-जनम मेरे दुख में बीते लंका में जैसे दुख पावे है सीते।। गुरु जी मेरा...
जीव तो माया की नींद में सोवै गुरु किरपा
बिन मुक्ति न होवै ।। गुरु जी मेरा...
जीवन उबारन सतगुरु आये ज्ञान का अमरत संग में लाये।। गुरु जी मेरा...
फुलसन्दे वाले बाबा किरपा करियो।
काल जाल से न्यारा करियो।। गुरु जी मेरा...


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