सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

चंदा से चादनी कब दूर है chanda se chadni

 चँदा से चाँदनी कब दूर है।

मेरे दिल में तुम्हारा नूर है।।

नूर तुम्हारा मेरे दिल में चमकता है।

हस्ती में मेरी रूप तुम्हारा दमकता है

आँखों में तेरा ही सरूर है।।


दिन में जैसे तारा कोई चमकता है

ऐसे ही मेरा दिल तुझको जपता है

चाहे निगाहों से तू दूर है।।


फुलसन्दे वाले बाबा ये कहते हैं

हम तो उस दिलबर के दिल में रहते हैं

तेरे दिल में भी मेरी चाह जरूर है।।





 नूर में तेरे मुझे जाने क्या नज़र आता है,

दोनों जहान का आइना नज़र आता है।

चेहरा तेरा अ सतगुरु दरवाजा खुदा का है,

आँखों में तेरी झूमता संसार नज़र आता है।


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