सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

चॅदा की चाँदनी में, झूमे-झूमे दिल मेरा chanda ki chandani

 चॅदा की चाँदनी में, झूमे-झूमे दिल मेरा ।

झूमें-झूमें दिल मेरा, झूम-झूमें दिल मेरा ।।

आजा रितु भरी खेल ले, फिर पछतावै अन्त ।

क्या सोवै तू बाबरी, चाला जाय बसन्त ।।

उनको सदा बसन्त है, जो जाय बसे धुर अन्त ।

कन्त मिलावा हो रहा, नैन हुए रसवन्त ।।

रितु बसन्त आयी मेरे सतगुरु, देओ ब्रह्म परकास।

अंधियारी मेरी आत्मा को चाँदने की आस ।।

मैं हूँ धुंद बादल का तारा, तुम अनन्त आकाश,

हे समरथ मेरे सतगुरु, मत छोड़ियो मेरा हाथ।

फुलसन्दे वाले बाबा, मत छोड़ियो मेरा हाथ।।




आपको पाता नहीं जब आपको पाता हूँ मैं,

या तो खो जाता हूँ या के खो दिया जाता हूँ मैं।

पैकरे हस्ती को परेशान जब पाता हूँ मैं,

तेरे आइने में आइना बन कर समा जाता हूँ मैं।


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