ऐरे सुनिये रे सन्त सुजान, धोके में मतना रह जाइये।
गुरु का रूप भगवान का रूप, तू भगति करके तर जाइये।।
विष कू खावै विष कू उगलै,
विष के बीज बोवै तेरी जुबान विष भरी,
एक दिन तुझको खोवै।।
करै बुराई सुनै बुराई बिरथा पाप बढ़ावै।
तेरा ही पाप परेत बन के तेरा कलेजा खावै ।।
तेरे मन में स्वर्ग का उपवन देवता जहाँ विचरते।
तेरे मन में नरक कुण्ड है जहाँ चण्डाल विचरते।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहते मन में अमरत भरिये।
सच्चे गुरु की सेवा करके भवसागर कू तरिये।।
धोके में मतना रह...
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""दामन से तेरे मुँह को हम ढक कर सो गये,
जागे थे ज़िन्दगी भर नींद आयी सो गये।
जिक्र सुनते-सुनते खड़े रहे गये फरिश्ते ,
और हम तुम्हारे ख्वाब में जाने कब सो गये।""
EK TU SACHCHA TERA NAAM SACHCHA


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