पहाडो से गिरे झरना तो सागर में चला जाता
जो तपता धरम कि अग्नि में वो मोक्ष पद में चला जाता
ये परचंग चोला काया का दिया परमात्मा ने हमें
पहन के इसे नरक जावे कोई पृभ के महल जाता
मनसा बाचा करमणा जिसने कर लिया निर्मल
वो अपनी आत्मा में ही झलक उस बृहा की पाता
धरो धीरज इसी कोहरे से सूरज भी उदय होगा
करे जो ब्रह्म उपासना वो ज्योती से भर जाता
किसी सपने की तरहा से रचा संसार ईश्वर ने
गुरू बचनों में जो चलता तो माया जालकट जाता
जो भोगो में फसां रहता वो दुःख में डूबा रहता
जो विष की तरहा इनको त्यागदे वो ही शान्ती को पाता
कहें फुलसन्दे वाले बाबा करो चिन्तन अविनाशी का
जो जिससे पेृम करता है उसी का दिन बन जाता
पहाडौ से गिरे झरना तो सागर में चला जाता
जो तपता धरम की अग्नि मे वो मोक्ष पद में चला जाता ॥॥
#ektusachchteranaamsachcha
#shrilankatrip
लेखक एवं गायक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले बाबा

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