कब तक उठाउँ मैं दुःख ही दुःख मुझे तेरे दर की तलाश है
जो भटकती रूहो का चैन हे तेरी उस नजर की तलाश है
तेरे नाम को तेरे ध्यान को मैने अपने दिल में बसा लिया
![]() |
| सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले |
चलता रहा तेरी राह में चाहे दुनियाँ ने कुछ भी कहा
मै तेरी नजर से न गिर सका ये तेरे बस की बात है
ओ आसमान वाले तू सुनले दूआ गरीब की
किसको सुनाउँ में दास्तां बिगडे हुए नसीब की
तूफान है बडी जोर का और आंधियों में चराग है |
किरपा करो मेरे साइंयां सीने में गम बेहिसाब है
मुझे अब गले से लगा भी ले मुद्दत से तेरी आस है |
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
लेखक एवं गायक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले


0 Comments
आपका हम स्वागत करते है