मतना पीवे दारू मतना पीवे
बरतन बेच के दारू पीवे यो कुनवा कैसे जीवे
बच्चे सब बीमार पडे हे हल कौले से लगे खडे हैं
कुछ कुत्ते तेरा मुँहचाट रहे कुछ मुँह में मूतने को तैयार खडे है
तेरी घरवाली रोज सवेरे तेरे फटे चीथडे सीवै.. मतना...
रोज शाम को यारो में जावे पीके आवे पिटके आवे
बाहर गाल चिरवाके आवे घर में आके धौस दिखावे
दूध बेचके दारू पीवे गोदी का बालक पानी पीवे
घरवाली के जेवर बेचे पडोसियों के हुक्के बेचे
अपनी माँ के चप्पल ठाये अपने बाप के जूते बेचे
तू पैदा होतयी क्यों ना मर गया धरती पे बोझ बनके जीवे... मतना.....
पीवे दारू गन्ना तेरा छिलने से पडा है तू हट्टी पे पियो पडा है
घर में किसी ने रोटी ना खायी सबके दिल पे सदमा अडा है
नाली में मुँह दियो पडा मक्खियों की भिन होवै.... मतना
पीवे दारू फुलसन्दे वाले बाबा कहते जो दुनियां में दारू पीते
जम के दूत मुँह चीरे उनका नरक में खून मवाद वे पीते
तीन लोक तक धक्के खावे जो कोई दारू पीवे.... मतना पीवे दारू .....


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