मेरे सतगुरू तारन हारी रे सुन लीजो अरज हमारी रे
तेरे संसार में भटकू में दर दर करम कठोर लिए फिरू दर दर
मैं जनम जनम दुखयारी रे सुन लीजो ०
जनम जनम मेरे पाप में बीते सुमरन बिन गए सांस में रीते
काल करम से में हारी रे सुन लीजो ०
हरी ने करम पास में बाँधा सुख दुःख जनम मरण में बाँधा
गुरू भव खण्डन हारी रे सुन लीजो
फुलसन्दे में तेरी जोत जगाउँ
तनमन में तेरी मन्त्र जगाउँ तन मन धन सब वारी रे सुन लीजो .......
लेखक एवं गायक : सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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