पार ब्रहम प्रभू परमेश्वर देवता करे तेरी आराधना
दूर गगन की छाँव में होवे झिलमिल झिलमिल चाँदना
तेरा गगन सिहांसन छत्र विराजे चाँद सूरज करे आरती
पार ब्रहम प्रभू परमेश्वर ....................
तेरे अनुराग की व्याकुलता में बेसुध मेरी आत्मा
तन मन में मेरा दीप जले हे करू में तेरी वंदना
पार ब्रहम प्रभू परमेश्वर ........................
संम्राट है तू संसार का तू हे सब राजों का महराज
सबसे ऊँचा हे तखत तेरा जहाँ झुकते देवताओं के ताज
पार ब्रहम प्रभू परमेश्वर....................


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