सत गुरू की गली में चल बन्दे दुनियां में तो हर तरफ अंधेरा है
दिल का पर्दा उठाके देख जरा वहाँ मौजूद मालिक तेरा है
संसार में तू परदेसी अपना वतन भुला बैठा
मालिक का दर छोड के दुनियाँ से लगन लगा बैठा
सतगुरू की गली.....
पंथ ग्रन्थ में फंसा तीरथ हजारों नहाए है
गुरू की महर बिना कोई निर्मल ना होने पाए हैं
सतगुरू की गली .....
गुरू का शब्द जपे बिना मोक्षद्वार नही पायेगा
गगन में सूरत चढाके लाखों पर्दों के पार तू जाएगा
सतगुरू की गली ...
फुलसन्दे वाले बाबा कहे देवी देवता जिसका ध्यान धरें
वो साहिब तेरे घट में बिराजे गुरू की मेहेर बिन न पायेगा ||
सतगुरू की गली .......
लेखक एवं गायक : सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
एक तु सच्चा तेरा नाम सच्चा
ek tu sachcha tera naam sachcha

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