तेरी दुनियाँ में परमेश्वर है अंधेरा घना छा रहा |
चाँदना अपना हमको दिखा चाँदना अपना हमको दिखा |
सूरज चाँद सब छिप गये तारा तक ना नजर आ रहा|
चाँदना अपना हमके दिखा ||
आज धरती के देवता भी ज्ञान अपना खो चुके
ऋषि मुनी ब्राह्मण सन्यासी दीन धरम सब खो चुके
हे विधना दुनियां पे जाने कैसा ये पर्दा पडा
चांदना अपना........
सोते रहे जो हिंन्दुऔ बेडा गरक हो जायेगा
द्रोपदी सीता को तुम्हारी कोई फिर उठाके ले जायेगा
क्या होगा सोचलो बखत तो बुरा आ रहा
चाँदना अपना...
सन्यासी बैरागी भी चिलम का धुवां उडाते है
मदिरा को चौदवां रतन चिलम को शिव का परशाद बताते है
साधू ने बाना तार धरा, लाटरी का टिकट ले रहा
चांदना अपना....
डूबते को कौन बचावै कोई नजर आता नही
आग लगी है हर तरफ कोई बुझाने आता नहीं
फुलसन्दे में बैठा हुआ रात दिन कर रहा हूँ दुआ
चाँदना अपना हम को दिखा॥॥
66.राम मिश्र आसावरी...
इस दुनियां में तेरा कोई नही तेरा कोई नही है
रात दिन किस माया में भटके तेरा कोई नहीं हें
लाख आँसू बहाओ कोई दिल का दुःख कम होता नहीं
चाहे कितना ही पूजलो पत्थर परमेश्वर होता नही
रात दिन किस माया ...
सुनसान रस्ते है इस जीवन के सबको अकेले जाना है
मृत्यू की धुंध से हो करके उस पार अकेले जाना है
रात दिन किस माया ...
फुलसन्दे वाले बाबा कहें वो आदमी भी क्या आदमी
दूसरौ के दर्द को समझे तो वो क्या है आदमी
रात दिन किस माया ...
ek tu sachcha tera naam sachcha
गायक एवं लेखक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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