ये दुनियां क्या है बस इन्सान की आँखों का धोखा है
क्या हस्ती हे यहाँ इन्सान की बस हवा का झोंका है
उडाकर आँधियाँ ले जाऐगी गुलसन का हर तिनका
बता अ बाग बा पतझड में तुझको किसपे भरोसा है
फकत दो चार दिन की चाँदनी रातों की रौनक है
है दुनियां रेत की दीवार तू जिसके साये मे सोता है
तू जिनके वास्ते खोता हे अपनी जिन्दगी के दिन
तुझे छोडेगे वो मजधार में जिनके लिये रोता है
क्या हस्ती हे ...
मिलेगी उसको मजिल जिसने दामन थामा सतगुरू का
चल दुनियाँ मे क्या हे धोखा ही धोखा है ...
गायक एवं लेखक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
#ektusachchateranaamsachcha
#एकतूसच्चातेरानामसच्चा


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