एक निरंजन पुरख मेरा दूसरा न कोय
लाखों सांग भरे संसार देख सके ना कोय
रखूं निर्जल उपवास सांस सांस वो समाया
मेरे पर्दे में वो रहे मेंने नहीं किसी को दिखाया
फुलसन्दे वाले बाबा कहते कोई पूजा करो दिन रात
बिना सच्चे प्रेम के वो पृभ ना आवे हाथ ॥
![]() |
| SATPURUSH BABA FULSANDE VALE |
एक वो निराकार है जिसे करू नमस्कार
बाहर भीतर वो ही है वो सागर मै पटार
ना मूरत की पूजा करू ना किसी को बुरा बताऊ
जिधर भी जावे मेरी दृष्टि अंर्तयामी को ही पाऊं
फुलसन्दे वाले बाबा कहते भेद भरम मिटाया
अपने पर्दे के भीतर ही वो बेपर्दा पाया ॥
****************************
EK TU SACHCHA TERA NAAM SACHCHA
SATPURUSH BABA FULSANDE WALE


0 Comments
आपका हम स्वागत करते है