जिस बुद्धि में परकास नही वो जीवन भर भटकता रहता है
अपनी ही तृष्णा की लहरों मे उलझ उलझके गिरता रहता है
जिस बुद्धि में परकास नहीं वो पशूऔ की तरहा जीता रहता है
अपने साथ साथ वो औरो को भी दुख दाह में खीचता रहता है
फुलसन्दे वाले बाबा कहें प्रभ सदा पवित्र बुद्धि बालो का संग देना
हर जनम में मिले बस सतपुरुष धन सम्पदा चाहे कुछ मत देना
राष्ट्र प्रेम का मूल्य प्राण है देखें कोन चुकाता है
देखें कौन सुमन शैइया तज कंटक पथ अपनाता है
धन्य है वे माता जिन्होने देश पर पूत वार दिया
अपनी आँख का तारा भारत माता की आरती में वार दिया
फुलसन्दे वाले बाबा कहते मेरा राष्टृ सदा अमर रहे
भारत माता पर जान देने वालों का तांता लगा रहे ॥
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एक तु सच्चा तेरा नाम सच्चा
लेखक एवं गायक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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