करम कर निष्काम रह रह जग से उदास
देख मस्तक के दर्पण में परमबृहम का परकास
दुख ना कर कलेस ना कर सदा आनन्द
प्रीतम तेरे प्राण बसा देख करके आँखें बंद
फुलसन्दे वाले बाबा कहते क्या भोग जोग संयास
जगत में तू सबसे धनी जो प्रभ प्रीतम तेरे पास॥
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मत उनको कभी दुख देना तुम्हे प्यार किया था जिन्होने
उन्हें मत अकेले छोडना कभी प्यार किया था जिन्होने
मत उनको सताना कभी तुम पर अहसान किया था जिन्होने
मत उनको कभी रुलाना तुम्हारे आँसू पूँछे थे जिन्होने
फुलसमन्दे वाले बाबा कहें उनको मत कभी दुख देना
तुम्हें प्यार किया था जिन्होने उनके आँसू हाथों पे ले लेना ॥।
मित्रता से मनुष्य को सफलता मिलती है
उच्च आचरण से लेकिन हर इच्छा पूरी होती है
चरित्रवान आदमी कभी हरता नहीं है
चरित्रहीन कभी मुँह उठाकर चल सकता नही है
फुलसन्दे वाले बाबा कहते तुम्हें ये चिन्ता है
लोग तुम्हारी बुरायी क्यों करते हें
बुरे बही है जो काम बुरे करते हैं
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एक तु सच्चा तेरा नाम सच्चा
satpurush baba fulsande wale


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