क्यो भटकता फिरे है तू संसार मे
तेरे दिल मे परमेश्वर का हे चाँदना
मन्दिर मे नहीं तेरे दिल मे परमेश्वर का है चाँदना
कौन दुनिया मे कायम रहा है
सदा मौत है सबके जाने का एक रास्ता
जिसने नेकी के रस्ते को अपना लिया
तेरे दर से मिला हे उसे चाँदना
क्यों भटकता.......
कौन राजा हे कौन भिकारी हे यहाँ
करमौ का खेल हे सब जुवारी यहाँ
उठके सब चल दिये दुनियाँ से एक दिन
बस कुदरत का बाकी रहा चाँदना
क्यो भटकता...........
कभी सुख है कभी दुःख हे संसार में
हर कोई बह रहा यहाँ मझधार में
जिसको अपना बना ले वो परवरदिगार वहीं पाएगा चाँदना
क्यो भटकता..........
कूडी पर से उठाया है तूने हमें
गले अपने लगाया हे तूने हमें
बाबा फुलसन्दे वालों पे कुर्बान हूँ
दे दिया जिसने अपना मुझे चाँदना
क्यों भटकता .......
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रंग महल के बीच मेरा सुल्तान बिराजे
तेरी सूरत पे कुरबान राजो के महराजे
ये तन मन मेरा दीबला जांमे जोत ब्रहम पर गास
अबिनाशी की सेवा मे चुप चाप वले दिन रात
साहिब के दरबार मे सत पुरखों के सरपे ताज
जो दुनिया की डोर में पडेगी मुँह पे आग
सुख सागर मे आके हसा मत फिरयो प्यासा
सागर मे आके सुख अमरत उपजै होवे सबद परकासा ॥।.


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