परमेश्वर चालीसा
EK TU SACHHCA TERA NAAM SACHCHA
हे आदि देव नमो नमः पुरख निरंजनम्
हे सनातन ब्रह्म नमन नमन तुभ्यम् ।
तुमको नमन हे परमेश्वर,
करूँ तेरी स्तुति हे परमेश्वर |
सच्चे गुरू के पैर पकड़ये,
अंध घोर भवसागर तरिये।
परमेश्वर का सिमरन करिये,
मंत्र यान चढ़ पार उतरिये ।।
शिवजी किसकी माला जपते,
पारब्रह्म की माला जपते।
पार्वती किसकी माला जपतीं
परमेश्वर की माला जपतीं।।
माया की देह जीव का बासा,
ब्रह्म सिंहासन परमेश्वर का बासा।
उसी का गणपति ध्यान धरै,
कार्तिकेय उसका सुमरन करें ।।
पानी-पवन-अगन आरती करते,
देवता उस दर से झोली भरते।
यमराज बैठे धरम सिंहासन,
परमेश्वर का करें आराधन ।।
विष्णु उसी का ध्यान करें,
लक्ष्मी उसी का ध्यान करें।
शेष करें उसका सुमरन,
गरूड़ करें उसका सुमरन ।
ब्रह्मा उसी की जपते माला,
सरस्वती उसी की फेरें माला ।
उसको गुरू बृहस्पति जपते,
विश्वकर्मा उसे ही जपते।
वेद की ऋचा उसे ही गावें,
ऋषि मुनि उसका ध्यान लगावें।
समुद्र पटारें उसे ही जपतीं,
गगन में हवाएँ उसे ही जपतीं।
धरती-गगन-स्वर्ग-पाताल,
सबमें एक वही दयाल ।
ठेकर का टुकड़ा संसार,
जिसमें होवे हाहाकार।
भाग्यवान करें उसकी आराधना,
रात-दिन रहे दिल में चाँदना।
गुरू बिन कोई ना भव से तरै,
बारम्बार जन्मे–मरै।
चाँद सूरज उसकी आज्ञा में फिरते,
बरफ में तपसी खड़े ठिठरते।
राम कृष्ण और देवी देवता,
सब उसके चरणों के सेवका।
हे परमेश्वर ! तुम्हें नमन,
हे जगदीश्वर ! तुम्हें नमन ।
हे अखिलेश्वर तुम्हें नमन,
हे भुवनेश्वर तुम्हें नमन।
हे परमेश्वर ! तुम्हें नमन,
हे देवेश्वर ! तुम्हें नमन ।
जीव पशु तू पशुपति,
हे अलख हे अगम मति ।
पाप नाशक दुख हरेश्वर,
संकट मोचन हे परमेश्वर ।
अकाल मृत्यु हरो परमेश्वर,
रोग सोग हरो परमेश्वर ।
एक तेरे मंत्र में तीरथ करोड़
जपते तुझे देवता तैंतीस करोड़।
ओंकार है तेरा रथ,निरंकार मंत्र तेरा रथ।
आराधना है तेरा रथ,
काया है तेरा रथ।
जीव में ब्रह्म चाँदना तेरा,
सबमें परमेश्वर चाँदना तेरा।
परमेश्वर तेरा मंत्र विमान,
गुरू सेवा से मिले तेरा ज्ञान ।
कोई जपे ओंकार,कोई जपे निरंकार |
कोई जपे सोहं सतनाम,
फिर भी तू आदि अनादि अनाम ।
मंत्र विमान तू विमान से न्यारा,
लख चौरासी में तेरा उजियारा ।
ऋषि-मुनि तेरी स्तुति करते,
देवता तेरे द्वार पे पानी भरते।
देवताओं को जो ईश्वर माने,
कभी नहीं वो तुझको जाने ।
जो देव स्थानों पे मदिरा माँस चढ़ावै,
मरके प्रेत हो नरक में जावै ।
साधु होके चिलम बजावे,
जीते जी राक्षस कहलावे ।
ब्राहमण होके मदिरा पीवै,
यमराज उसके गलाफू सीवै।
साधु होके छल करै,
यमराज उसे घायल करै ।
साधु होके झूठ बोले,
यमराज तराजू में उसे तोले ।
सच्चे गुरू से द्रोह करै,
यमलोक में सौ-सौ दफा मरै।
दान से जो गुज़र करै,
कुत्ते की जूनी में पड़े।
सच्चे गुरू की जो शरण त्यागे,
जन्म-जन्म में दुख उसके पीछे भागे।
परमेश्वर के अलावा और का मंत्र जपे,
घोर अंधकूप में गिरे।
भूत-परेत की जो पूजा करे,
अकाल मृत्यु से मरे।
पीर-मजारों पे मुर्गे चढ़ावे,
जीते जी असुर हो जावे।
देवताओं की जो भक्ति करै,
स्वर्ग जावै फिर नीचे गिरे।
माता-पिता को जो दुख देवे,
यमराज उसकी खबर लेवे।
जो माँ-बाप दान-धर्म त्यागें,
देवता उनसे दूर भागें।
शरीर है मृत्यु की गुफा,
जहाँ ईश्वर का दीवा जला हुआ।
परमेश्वर तेरी करूँ आराधना,
जल-थल सबमें तेरा चाँदना।
जगत में घनघोर अँधियारा,
परमेश्वर तेरा मंत्र उजियारा।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा,
दुनियाँ झूठी तू एक सच्चा।
चार दिन का फकत संसार,
पाँचवे दिन होवे उजाड़।
फिर काहे की चिन्ता करै,
क्यों ना परमेश्वर को सुमरै।
परमेश्वर का मंत्र जपो,
सतपुरुष बाबा फुलसन्दे वाले कहते फिरते
परमेश्वर चालीसा का जो कोई श्रद्धापूर्वक पाठ करै।
अकाल मृत्यु कभी ना होवै,
दुख रोग सोक संताप कटे।
मृत्युदेव यम ले गये,
सतपुरूष को उस पार
असंख्य लोकों में जहाँ,
होता था ब्रह्म गुंजार |
स्वर्ग नरक उन्हें दिखलाये,
ले गये परमेश्वर के धाम
जहाँ असंख्य देवी देवता,
जपते थे उसका नाम ।
हाथ बढ़ाकर परमेश्वर ने,
उनको हृदय से लगाया
उनके निर्मल नूर को अपने नूर में समाया ।
जब धरती पर लौटे सतपुरूष थे वो ब्रह्मरूप
उनके मुख पर फैली थी परमेश्वर की धूप ।
उनके मुख से बोलता था, वो परमेश्वर निरंकार |
जिस पर उनकी दृष्टि पड़ती, होता वो हृदय उजियार ।
कितनों को उन्होंने मानुष से देवता बनाया
पारब्रह्म परमेश्वर मनुष्य के ही बीच दिखाया ।
चारों वेद पुरूष ब्रह्म के प्रेम में उन्होनें गाये
कितने ही दीन दुखी गरीब गले उन्होंने लगाये ।
तेरे भीतर बसा करतार | जैसे सागर में सोई पटार ।
अपने भीतर उसे पुकार | हो जावेगा हृदय उजियार।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
SATPURUSH BABA FULSANDE WALE


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