पीता हूं निगाहौ से शीशा है ना पैमाना
हर सिम्त तू ही है काबा है ना बुतखाना
हर नक्श ख्याली है काबा हे ना बुतखाना
तू मुझमे हे मे तुझ में अ जल्वाए जानाना
पीता हूं ....
साकी तेरे दम से है आबाद ये मयखाना
तू जीतन काबा है तू रौनके बुतखाना
पीता हूं ....
काबे की सियाह पोशी करती है पुकार हर दमकहते हो किसी काबा वो भी हे खनम खाना
पीता हूं ...
तू हुस्न तजल्ला है दिल तेरा दीवाना
तू काबे का काबा है बुताने का
पीता हूँ .....
में होस हवास अपने इस बात पर खो बैठा
हसके जो कहा तुमने ये हे मेरा दीवाना
पीता हूं ...
जाहिद मेरी किस्मत में सजदे हे इसी दर के
छूटा हे ना छूटेगा संगे दरे जनाना
दुनियां में मुझे तुमने अपना बनाया है
मशहर मे भी कह देना ये हे मेरा दीवाना
पीता हूँ .....॥।


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