सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सुमिरन पाठ sumiran path || ek tu sachcha tera naam sachcha

 

सुमरन पाठ

एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ।

नमो परमेश्वर पारब्रह्म |

ध्यावें ऋषि मुनि सिद्ध गण।

भर्गो ज्योति तरंग स्थित ध्यानै सुक सनकादि सनातनम् ।।

जय आदिनाथ अविनाशी आत्मा जगत मूल जग कारणम् ।

नारद शारद नाद स्थित गावैं निस दिन योगी जन ।। ब्रह्मा विष्णु ध्यान धरें शिव शेष कार्तिकेय गणेश आराधितम् ।

मैं नारायण नार तेरी, तू पुरूष मेरा पारब्रह्म ।

एक तेरी आस एक तेरी याद में मैं सिर झुकाये तेरी शरण ।।

देह यान में स्थित जीव विचरे लोक लोकान्तरम् ।

इयम प्रकाश आत्मा परमात्मा जिसे नमन करें योगी सिद्धम ।।

नमो एक ओंकार, नमो एक निरंकार |

नमो एक अगम अविनाशी, नमो एक घट घट के बासी। नमो एक परम धाम, नमो एक अकह अनाम ।

नमो एक अनन्त अनाम, नमो एक सदा सुल्तान ।

नमो एक महेश्वर ज्ञानी, नमो नमो एक अर्तयामी ।

नमो एक तेरा साँचा नाम, नमो पारब्रह्म भगवान।

ओम नमो निरंकार, ओम नमो परम करतार |

ओम नमो परम गति, ओम नमो अगम मति।

ओम नमो परम ज्योति, ओम नमो प्रजापति ।

ओम नमो परम पुरख, ओम नमो सरभंग सरबत ।

ओम नमो परम ज्ञान, ओम नमो परम ध्यान। 

ओम नमो आद पुरख, ओम नमो अकाल पुरख ।

 ओम नमो परमपुंज, ओम नमो नाद गुंज |

 ओम नमो परम तेज, ओम नमो अभेद एक । 

ओम नमो नाद ब्रह्म, ओम नमो पारब्रह्म । 

ओम नमो परमदेव, ओम नमो देवाधिदेव । 

ओम नमो सनातन पुरख, ओम नमो अकाल पुरख । 

ओम नमो सत सत, ओम नमो परम गत ओम नमो अगम अगम, 

ओम नमो अलख अगम । 

ओम नमो विराट ब्रह्म, ओम नमो निराकार ब्रह्म । 

ओम नमो राजेश्वर राजे, ओम नमो राजे महाराजे । 

ओम नमो दीन दुख हारी, ओम नमो महाराज मुरारी। 

ओम नमो नमो नारायण, ओम नमो नमो तरन तारन । 

ओम नमो राज महाराज, ओम नमो गरीब नवाज । 

ओम नमो बे–मोहताज, ओम नमो सरब के नाथ । 

ओम नमो नमो गुरू ज्ञानी, ओम नमो निरंजन ज्ञानी । 

ओम नमो करन करतार, ओम नमो नमो तारनहार । 

ओम नमो निराकार, ओम नमो नमो साकार। 

ओम नमो एक ही एक, ओम नमो एक ही देव । 

ओम नमो एक अविनाशी, ओम नमो एक घट बासी। 

ओम नमो एक जगदीश्वर, ओम नमो एक महेश्वर ।


 

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ओम नमो नमो छत्तरधारी, ओम नमो भय भव दुख हारी। 

ओम नमो सरब आधारे, ओम नमो करन करतारे । 

ओम नमो परम उदासी, ओम नमो नमो सुख बासी। 

ओम नमो दुख दारद हन्ता, ओम नमो नमो महन्ता । 

ओम नमो नमो विश्व स्वरूपे, ओम नमो परम भव भूपे । 

ओम नमो परम परगासे, ओम नमो परम आराधे। 

ओम नमो निर्मल ज्योति, ओम नमो नमो सच्ची ज्योति । 

ओम नमो बे जिस्म शरीरा, ओम नमो सदा सदा हजूरा। 

ओम नमो महाकाल काल, ओम नमो परम पुरख अकाल । 

ओम नमो तिरगुन के धारी, ओम नमो गुणातीत पुरारी। 

जोत निरंजन ओंकार निरंकार सोहंग सतनाम, अंतहीन तुझे प्रणाम । 

ओम नमो अनाथ के नाथ, ओम नमो दीन के नाथ। 

ओम नमो ज्योति भरपूर, ओम नमो महाराज हजूर । 

ओम नमो स्तुति तेरी, ओम नमो आराधना तेरी। 

ओम नमो नमो तारनहारी, करे स्तुति दास तुम्हारी । 

एक अनन्ता सुमरन करये, सुमर सुमर भव पार उतरये ।

 सुमरन करते संत सुजान, सुमर सुमर भव अगम लखान । 

सुमर सुमर भव सागर तरे, जो सुमरे कभी ना मरे । 

सुमरन करये पारब्रह्म, सुमरन करये अलख अगम । 

सुमरन करते देवता देव, सुमरन में लागे महादेव ।

सुमरन करते सिद्ध सुजान, सुमरन करते परम निधान । 

सुमरन में धरती आकाश, सुमरन करे पाप का नाश। 

सुमरन करये निरंकार, सुमरन से करये भव पार | 

सुमरन करये बेअन्त बेअन्त, सुमरन सदा बहार बसन्त । 

सुमरन से उठे धुन झनकार, सुमरन से चाँदन उजयार | 

सुमरन से पाइये करतार, सुमरन से होवे भव पार।। 

सुमरन से सब जग उपजाया, सुमरन में खुद ब्रह्म समाया। 

जो सुमरे परम गति पावे, सुमरे से परमपुरख कहावे । 

सुमरन घट में जोत प्रगटावे, सुमरन जोत दिन रात जगावे । 

सुमरन करे कोई बड़ भागी, निरंकार से जिनकी लौ लागी। 

बड़े भाग सुमरन को पाइये, सुमरन सबद सीस चढ़ाइये । 

सुमरन करे अंधेरा दूर, सुमरन से चाँदना भरपूर । 

सुमरन करते धरमराज, सुमरें लिख लिख चित्रगुप्त महाराज । 

सुमरन सकल पाप को खावै, घट में पारब्रह्म दरसावै। 

सुमरन करे जगत निस्तारा, सुमरन में आप बसे करतारा । 

तेरा अन्त ना कोई पावै, कोई तेरी स्तुति कैसे गावै। 

जो मन में तेरी जोत जगावै, वो साहिब तेरा दास कहावै । 

ये जग जान सराय साधो, एक आवै एक जावै साधो। 

नहीं भरोसा है इस तन का, ये तो जीव पखेरू बन का। 

अन्त समय कोई संग ना साथी, नाम निरंजन दीपक बाती। 

जहाँ तक दीखे अन्ध गुबारा, परमेश्वर का नाम उजयारा।


तैंतीस करोड़ देवता सुमरन में लागे, आठो पहर ध्यान में जागे। 

सुमरन करते रूद्र वसु, सुमरते सिद्ध परम तपेसरू । 

सुमरन करते धरती आकाश, सुमरन में लागे पवन पानी आग। 

सुमरन में लागे अवतार, खुद को सिमरै निरंकार | 

सुमरन करते ब्रह्मा महेश्वर, सुमरते विष्णु देवी जगदीश्वर । 

सुमरन में लागे सब कोई, सुमर सुमर निर्मल मति होई।

 सुमरन करये सुमरन करये, गगन गुफा में सुमरन करये । 

पाँच तत्व गुण तीन से पारा, चढ़ हंसा पीवे अमृत धारा ।

तीन लोक गुण तीन से पारा, जहाँ मेरे साहिब का दरबारा । 

आतम तत जिन हृदय धारा, झिलमिल रैन दिवस उजयारा । 

पलक में अलख लखै ओंकारा, नादब्रह्म की बहती धारा। 

सुमरन से दुख पाप मिटे, सुमरन से होवे उजयारा। 

सुमरन मेरे पारब्रह्म का, जगत का तारनहारा। 

सुमरन पार उतारनहारा, एक तू सच्चा झूठा जगत पसारा। 

सुमरन करे कोई गुरूमुख प्यारा, भीतर बाहर जिसे उजयारा। 

सुमरन करे कोई साध का प्यारा, आतम तत् जिन हृदय धारा । 

सुमरेंगे कोई परम सियाने, जिनके घट में ब्रह्म समाने। 

सच्चा सुमरन करते संत, आठो पहर जिनको बसन्त । 

क्यों भला सुमरन करे संसार, जिसपे कुदरत की फटकार | 

जिसपे प्रभ मेहेर बरसावे, उसको अपना नाम सुमिरावे । 

सुमरन ज्योत सीस पे धारी, सुमरन सोक पाप दुख हारी।

          



करे सकल दुख पाप का नास, प्रभ तेरा सुमरन परकास ।
सुमरये नारायण अविनाशी, तुरत कटे दुख जम की फाँसी ।
सुमरन करये मीत पियारे, सुमर सुमर के लगे किनारे ।
कली काल में एक धरम, अलख निरंजन का सुमरन ।
सुमर सुमर गुरू सेव कमाइये, सुमर सुमर गुरूमुख तर जाइये ।
सुमरन परकास सीस पे धरये, सुमरन ताज माथे पर धरये।
सुमरन सुनके जम पास ना आवे, सुमरन से संकट कट जावे ।
सुमरन से मनोरथ पूरे, पाइये पारब्रह्म हजूरे ।
जिस पथ में घेरे अंधयारा, सुमरन संग करे उजयारा।
जहाँ महा भय आके घेरे, सुमरन फन्द काटे सब तेरे।
सुमर सुमर पग आगे धरये, साँस साँस पे प्रभ सुमरये।
सुमरन में जो सुरत लगावे, सुमर सुमर साहिब में समावे ।
जिसके सिर पे तेरा उजयारा, उसका ना कोई मेटनहारा।
जिसने आतम सिमरन धारा, उसका ना कोई रोकन हारा ।
निवाऊँ मैं पग पग पे माथा, सबमें जानी तेरी गाथा ।
तू मेरा साहिब मेहेरबान, तू खालक मेरा मेहेरबान करे गरीब तेरी आराधना,
मेरे साहिब तेरी आराधना। फुलसन्दे वाले बाबा कहते,
ब्रह्म उजाले तुझमें रहते ।
बाहर भटकता क्यों फिरै,तेरे भीतर अमर जोत फिरै ।
जब जीव से तू बन जावे ब्रह्म, जनम मरण हो जावे खतम ।

एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ।

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