मैं जोगन तेरी दिवानी ओ नीले अम्बर वाले ।
ऋषि मुनि पीते रहते हैं तेरे हाथों से अमृत प्याले ।।
ये नूर इस दुनियाँ में तेरे साथ उतरा होगा।
ये चाँद तेरे रूप का छोटा सा टुकड़ा होगा।।
बाँध घुघरू नाचूँ छम छम तोड़ी जगत की आस ।
मैं तेरे चरणे की दासी परम पुरख सरताज ।।
मेरी आँख हो तेरा दीदार हो मेरा दिल हो तेरा उजयार हो।
पतझड़ हो या बहार हो, जिन्दगी में तेरी झंकार हो।
नैने तेरे अमृत के प्याले अमर हो गये पीने वाले।
तारों की छाँव में फिरूँ अकेली परमपुरख हमें गले लगाले ।।
दर्पण जैसी मेरी काया जिसमें निस दिन तेरी छाया ।
पकड़ के सपनों की डोरी आता कोई चोरी चोरी ।।
सुभा हुई सब पंछी जागे लेके तेरा नाम ।
मेरे भीतर धूप उतरी जपते हुए तेरा नाम ।।
वृद्धावस्था टूटी फूटी इमारत जैसे दुख की रात।
काया कोयले जैसी हो गई थर-थर काँपे गात ।।
कभी फूलों की टहनी जैसा था मेरा कोमल गात।
सावन के बादल से केश चंदन जैसी सुवास ।।
आँखे मेरी धुंदली धुंदली शाम ढ़ले चुपचाप ।
उल्झे उल्झे केश मेरे जैसे बीत गई बरसात ।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहते उमर सब गई बीत।
पतझड़ की इस शाम में मैं गाती दुख के गीत ।।
ek tu sachcha tera naam sachcha
लेखक एवं गायक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले


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