तुम हो तो मेरे गुलशन में बहार है
तुम हो तो मेरे गुलशन में बहार है।
सतगुरू मेरे संग तुम्हारा उजयार है।।
सोने का दीवा बाले चाँदनी रात में।
सपनों में सतगुरू फिरूँ तेरे साथ में ।
दिल के अंधेरों में तुम्हारा उजियार है।।
जिक तुम्हारा करते रहते हैं
फरिश्ते चाँदी की किताबें पढ़ते रहते हैं।
मेरी नजर को बस तुम्हारा दीदार है।।
दिन रात जपता तेरे प्रेम की माला
तुम से ही है मेरे दिल में उजाला
आँखें तो वही है जिनको तेरा दीदार है।।
तेरे बिना कांटो जैसे फूल चुभते हैं
दुनियाँ के रंग तुझ बिन फीके लगते हैं।
आज भी दिल को बस तेरा ही इन्तजार है।।
मेरे अंधयारे दिल में तुमसे है रोशनी
हर सूरत में मुझको दीखे तेरी रोशनी
सतगुरू तुमपे मेरी जिन्दगी निसार है।।
कितना गिर गया है ये आज का आदमी
जानवर से बदतर हो गया है आदमी
सही बात सुनना तक भी इनको नागवार है।।
फुलसन्दे वाले बाबा तुमसे है चाँदना
परमेश्वर का तुम हो चाँदना।
सामने तुम्हारे कब ठहरा अंधकार है।।
तुम हो तो मेरे गुलशन में बहार है।
सतगुरू मेरे संग तुम्हारा उजयार है।।


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