तुम उस तरफ खड़े रहे मैं इस तरफ खड़ा रहा
तेरा नूर गगन में था मेरा साया जमी पे था।
तुम उस तरफ खड़े रहे मैं इस तरफ खड़ा रहा ।।
उसके मिलने में भी एक दर्द था पर्दा था।
कैसे तुझे देखता मैं आँखों पे तो गर्दा था।।
अम्बर के गुम्बद पे चिराग जलता रहा।
और मन संसार की गलियों मे भटकता रहा ।।
तेरी राह में आके भी लोग ठोकर क्यों खाते हैं।
जिन्हें बनना था देवता जानवर बन जाते हैं।।
गुरू चरणों की छाया में मैने पारब्रह्म जपा।
हे प्रभ तेरी प्रेम अगन में रात दिन मैं तपा।।
जुग जुग करूँ तेरी बंदगी जुग जुग करूँ तेरी पूजा ।
मेरे हृदय में तेरे सिवा नहीं और कोई दूजा।।
धन धन के सुहागनी पति जिनको प्यार करे।
बेमुख जो सौहर से दोनो दुनियाँ में ख्वार फिरे ।।
देवदानव मानव सब प्रभ तेरे गुलाम हैं।
तेरा हुकम जो माने नहीं वे दुनियाँ में खलकान हैं।।
चाँद की निर्मल चाँदनी मेरी आँखों में लहराती।
मेरी आत्मा तेरी सुगन्ध रस्तो पे बिखराती।।
मुश्किल सत का रास्ता फरिश्ते गिर गिर जाते।
तेज हवा चले रात दिन दिये बुझ बुझ हैं जाते।।
उसके हाथ में प्याला वो चाहे जिसको देवे।।
जिसे चाहे लगावे गले चाहे अपना कर लेवे।।
फुलसन्दे वाले बाबा झूठी प्रीत दुनियाँ की जानी।
जैसे टूटे छप्पर में आवे बारिश का पानी ।।

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