दिल के हुजरे से तेरी आवाज सी आती रही
दिल के हुजरे से तेरी आवाज सी आती रही ।
कोई शम्मा रोशनी बन राह दिखलाती रही।।
दैरो काबा में तुझे बुतखाने मैं ढूँडा किये।
रात भर सागर में तेरी याद लहराती रही।।
आसमानों में फरिश्ते सर झुकाए खड़े रहे ।
हुस्ने माहेताब से सज्दों की आँच आती रही।।
जिन्दगी क्या थी मेरी इक दर्द का सैलाब थी।
वो नहीं आए तो उनकी याद तो आती रही।।
सर को पाए-यार रख होती रही मेरी बंदगी।
इस तरहा तेरी मुहब्बत मुझको तड़पाती रही ।।
मुझको तेरे इश्क ने नहीं चैन से रहने दिया।
जिन्दगी तेरी रूह में ठोकरें खाती रही ।।
अक्ल की गर्दिश हर एक मंजिल को भटकाती रही।
राहगुजारे इश्क हर मंजिल को चमकाती रही।।
फूल तो कभी इस दामन कभी उस दामन मे जाते रहे।
हाँ मगर खुशबु हर एक दामन को महकाती रही।।


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