चलते चलते देखये हम कहाँ तक आ गये
चलते चलते देखये हम कहाँ तक आ गये
आपके ख्वाबों से उतरे तो ज़मीं पर आ गये ।।
__ छोड़ के जन्नत की गलियाँ आदम पछताया बहुत
यार के पहलू से उठ के गम की बस्ती में आ गये ।।
कपड़े फाड़े अपने कोई फिरता है वीरानों में
सुनते हैं दुनियाँ में फिर से दिन बहारों के आ गये ।।
मेरे आशनाओं ने मुझे किस जगहा पे छोड़ा है
एक एक ने सौ सौ दफ़ा दिल को मेरे तोड़ा है
रोशनी के पंख लेकें मुझ तक फरिश्ते आ गये ।।
आँख में रोशनी ना थी रूह में खुशबू ना थी।
जाने किसकी जुस्तजूं में हम गुजसितां तक आ गये ।।
मेरी पलको पे सितारे उनके होठों पर हंसी
किस्सा -ए- गम कहते कहते हम यहाँ तक आ गये ।।
ठोकरें खा-खा के मैने सुर्ख रूह को कर लिया
सुर्ख फूलों की तपन में दिन जिन्दगी के आ गये।।
फुलसन्दे वाले बाबा तुम किन ख्यालों में हो गुम
पैर के तिनके भी देखो उड़ के सिर तक आ गये ।।
जिस्म का प्याला पुराना उनके कदमों पे रख दिया
अपने आप चलके बादल मुझको लिवाने आ गये ।
लेखक एवं गायक : सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

1 Comments
Ek tu sachcha tera naam sachcha
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है