ek tu sachcha tera naam sachcha
तेरे दर पे दिया जलाया है
दिल में जब भी अँधेरा छाया है।
तेरे दर पे दिया जलाया है।।
जब मेरा बेड़ा डगमगाया है।
तुम्हें अपने करीब पाया है।।
रास्तों में जो थक के बैठ गया ।
उसको मंजिल ना मिली
जो रूक के बैठ गया।
सबमें तेरा नूर जगमगाया है। तेरे दर पे दिया......
मैंने हर एक दिल में देखा है तुम्हें ।
अपनी हर साँस में पूजा है तुम्हें।
सबमें तेरा नूर जगमगाया है। तेरे दर पे दिया....
देवताओं से तू ना पाया गया ।
अक्ल की हद में तू ना लाया गया।
ऋषि मुनियों ने तुझे गाया है। तेरे दर पे दिया....
तेरी चाहत में दिल ऐसे जले ।
जैसे वीरानों में कोई शम्मा जले ।
तेरी चाहत ने दर-दर फिराया है।
तेरे दर पे दिया......
दुनियाँ परछाई है और कुछ भी नहीं।
मट्टी का पुतला हूँ मैं और कुछ भी नहीं।
नूर तेरा सीने में झिलमिलाया है। तेरे दर पे दिया....
किसकी हस्ती है जो तुझ तक पहुँचे ।
तेरे दर तक ना फरिश्ते पहुँचे ।
पहुँचा वो जिसपे गुरू का साया है।
फुलसन्दे वालों ने ये बताया है, तेरे दर पे दिया......


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