सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

संसार दुखों का सागर है एक तेरा नाम जहाज है ek tu sachcha tera naam sachcha

 संसार दुखों का सागर है एक तेरा नाम जहाज है

संसार दुखों का सागर है एक तेरा नाम जहाज है

काया के अंधेरे में तेरी ज्योति तेरी ही आवाज है।।

जाने कितने जनम मरण बीते

जाने कितने पतझड़ बीत गये

संसार समन्दर के तट पे

जाने कितने युग मुझे बीत गये ।

जाने कितने देवता ऋषि मुनि आतम ज्योति में ध्यान धरें।

जाने कितने सिद्ध पितर योगी है प्रभ तेरा व्यख्यान करें।

मोह माया के अँधयारे में सारा जगत डूबा पड़ा

वो ही पार हुआ भव सिन्ध से धर्म आचरण जिसने करा।

स्वारथ से भरा संसार है परमार्थी भी कोई होगा

दुख दर्द भरी इस दुनियाँ में कही सच्चा प्यार जरूर होगा।

सतपुरख बड़े परमार्थी हरे औरों की पीर

यमराज ने सत्यवान लौटाए बाँधी सावित्री की धीर ।

हैं देवता भी इस धरती पर हैं राक्षस भी इस धरती पर

तू पाप करे या पुण्य करे दो दिन हैं तेरे इस धरती पर ।

सतगुरू को अपना समझा नहीं मैंने दुनियाँ से हेत लगाया

मोह माया में गिर के मैंने अपना धर्म गँवाया।

मन चतुराई से बाज ना आवे बार बार दुख पावे

हंस-हंस पाप के बीज बोए रो-रो के फल खावे।

चतुराई और सियाणपा कुछ भी काम ना आया

जब छोड़ कर के दुनियाँ जाने लगा सिर धुन–धुन पछताया।

पाप आत्माओं के बीच में जपूँ मैं तेरा नाम

मैं भवसागर के बीच खड़ा सच्चे प्रभ सुल्तान।

फुलसन्दे वाले बाबा कहें मैने जनम जनम दुख पाया

जब सतगुरू ने हाथ पकड़ा परम पुरूष से मिलाया

लेखक एवं गायक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले




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