सतगुरू लिये खड़े हैं चाँदना
बैचैन है क्यों संसार में, दो चार दिनों के वास्ते।
सतगुरू लिये खड़े हैं चाँदना, मृत्यु से परे तेरे वास्ते ।।
जाने कितने ही युग बीत गये अज्ञान के कोहरे में तुझको।
निरंकार पुरूष तो तुझमें ही है, जाने कब से बुलावे है तुझको।।
तेरे भीतर परमेश्वर बैठा, परमेश्वर के भीतर तू है।
माया के हाथों तू छला गया, नहीं जाने आदि ब्रह्म तू है।।
देवी देवता धरती पे आके, करे परमेश्वर की आराधना।
मन द्वन्द रहित हो जावे तो, ये ही सबसे बड़ी है साधना ।।
कुण्ठाओं से रहित जिसका मन, वो ही बैकुण्ठ वासी है।
सबके भीतर जो देखे उसे, वो ही साधक सन्यासी है।।
तेरी इस देह के भीतर और भी कितने शरीर है।
देवता करते स्तुति खड़े भवसागर के तीर हैं।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहें कुछ दिन का तू मेहमान है।
तुझे याद नहीं क्यों भेजा तुझे, तू माया में परेशान है।।
ek tu sachcha tera naam sachcha


2 Comments
ek tu sachcha tera naam sachcha
ReplyDeleteek tu sachcha tera naam sachcha
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है