पतझड़ की उदासियों में तुम चाँद बनके आए
सतगुरू तुम हो रजनी गन्धा तुम हो गगन के चंद्रमा
रात दिन तेरी महक से महके मेरी आत्मा।
मेरे मन की गुफाओं में तुमने दिये जलाए
पतझड़ की उदासियों में तुम चाँद बनके आए।।
ये संसार है रजनी विषाद की सतगुरू तुम रजनी गन्धा
मेरी आत्मा देवआत्मा सतगुरू तुम हो देवगन्धा ।।
मेरे मन की नदी के किनारे पंछी उड़-उड़ आते हैं
चाँद सितारे हाथ पकड़े गगन का फेरा लगाते हैं ।।
तन मन अर्पण कर दिया तुमको इसके बाद तुम्हें क्या दूँ
सोचता रहता हूँ खुद के सिवा अलख पुरख तुमको क्या दूँ ।।
सागर की लहरों का गर्जन मेरे आर पार है
एक तरफ अँधयार है दिल में एक तरफ उजयार है।।
मेरे तन की झोपड़ी में एक तेरा दिया जले है
रात दिन साया तुम्हारा मेरे संग चले है।।
तेरा नाम जब से हमने अपने दिल पे लिख लिया
ना किसी से कोई शिकायत ना किसी से कोई गिला।।
ना कोई सुख देवे ना कोई दुख देवे अपना ही कर्म विधाता है
अपने ही कर्मो से फल मिलते कर्म ही काँटे उगाता है।।
खुली आँखों से देखते ऋषिगण इस तन में होवे आरती
मन का अंधेरा त्याग के करो अलख पुरख की आरती।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहें हे मेरी आत्मा के उजयारे
जगत द्वन्द के कोलाहले आत्मा तुझको पुकारे।।
ek tu sachcha tera naam sachcha bhajan
ek tu sachcha tera naam sachcha lyrics
writer and singer : satpurush baba fulsande wale

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