जो डूबे तेरे प्रेम में हो गये भव से पार || jo dube tere prem men || ek tu sachcha tera naam sachcha
जो डूबे तेरे प्रेम में हो गये भव से पार
घट में बलती जोत निरंजन, उठे अनहद झंकार
जो डूबे तेरे प्रेम में, हो गये भव से पार |
एक तेरी सूरत आँखों में, और ना दूसरी बात
हाथ प्याला लिए फिरूँ, मैं मस्त हुआ दिन रात ।
इश्क पियाला जहर भरा, हुए आशिक कितने हलाल
पीवेगा कोई सूरमा, कोई माई का लाल।
जो संतो मुझे बुरा कहे, मैं उनके लागूं पाँव
परमब्रह्म को जप रहा, मैं बैठा जगत तरू की छाँव ।
गुरू की खलड़ी ओढ़ के, तेरा ध्यान धरूँ करतार
सबका दाता एक तू, तू साँचा परवरदिगार |
गुरू की खलड़ी ओढ़ के, मैं घूमा जगत जहान
दूसरा कोई ना मिला, सिवा एक भगवान ।
नारायण संसार में, सब ही ब्रह्म के भेष
सबके भीतर एक चाँदना, देख सके तो देख।
वो ही मेरा परमेश्वर, वो ही मेरा करतार
जो घट घट में बोलता, कारन करन करतार |
पर्दे के पीछे बैठके, झांकता सब की ओर
सबको खेल खिला रहा, पकड़ पुतली की डोर ।
सतगुरू सच्चा बादशाह, काल करम मिटावे
तन में बाँधा जीव काल ने, गुरू आवे तो छुड़ावें ।
आत्मा झूलती थी अपने, भवन चढ़ी आकाश
लेख लिखाया काल संग, सहे दुख संताप।
किस कारण देह संग बंधी, देश निकाला पाया
छोड़ा धुर–धुर आपणा, मैला भेष रचाया।
संतो ये तन पीजरा, पंछी जीव बसेरा
फुलसन्दे वाले बाबा कहें, करूँ जगत का फेरा ।
गायक एवं लेखक : सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

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